February 24, 2026

विदेश यात्रा के बाद 4 जनवरी को दिल्ली पहुंचेंगे तेजस्वी, जल्द आएंगे पटना, नेताओं के साथ करेंगे मीटिंग

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख चेहरों में शामिल तेजस्वी यादव अपनी विदेश यात्रा समाप्त कर भारत लौटने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे रविवार 4 जनवरी को दिल्ली पहुंचेंगे और इसके बाद जल्द ही पटना आकर पार्टी नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे। तेजस्वी की वापसी को बिहार की सियासत में नए घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
विदेश यात्रा के बाद वापसी की तैयारी
करीब एक महीने से तेजस्वी यादव के विदेश में होने की चर्चा चल रही थी। बताया जा रहा है कि वे अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा पर गए थे। सूत्रों के अनुसार, 4 जनवरी की सुबह उनके दिल्ली पहुंचने की संभावना है। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल की ओर से अब तक उनकी यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर और राजनीतिक हलकों में उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दिल्ली में नेताओं के साथ बैठक
दिल्ली पहुंचने के बाद तेजस्वी यादव के एक-दो दिन राजधानी में रुकने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान वे दिल्ली में मौजूद आरजेडी नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में पार्टी की वर्तमान स्थिति, संगठनात्मक मजबूती और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती है। बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी को दोबारा सक्रिय और मजबूत करने की रणनीति पर भी मंथन की संभावना है।
लालू प्रसाद यादव से मुलाकात
तेजस्वी यादव के पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव फिलहाल दिल्ली में ही हैं। पिछले महीने उनकी आंख का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद वे चिकित्सकीय निगरानी में रहे। तेजस्वी यादव के दिल्ली पहुंचने पर अपने पिता से मुलाकात करने की भी संभावना है। यह मुलाकात राजनीतिक के साथ-साथ पारिवारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पटना लौटने का कार्यक्रम
सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव 5 या 6 जनवरी को पटना लौट सकते हैं। पटना पहुंचने के बाद उनके द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठकें किए जाने की संभावना है। इन बैठकों में चुनावी हार के बाद की स्थिति, विपक्ष की भूमिका और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि तेजस्वी की सक्रियता से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा।
चुनावी हार के बाद सार्वजनिक दूरी
पिछले साल संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से तेजस्वी यादव ने मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से काफी हद तक दूरी बना ली थी। वे 1 और 2 दिसंबर को विधानसभा सत्र में शामिल हुए थे, लेकिन 3 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में नजर नहीं आए। इसके बाद से उनकी अनुपस्थिति लगातार चर्चा का विषय बनी रही।
विदेश यात्रा को लेकर सियासी चर्चाएं
तेजस्वी यादव की लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूरी और विदेश यात्रा को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं। आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने उनके यूरोप टूर पर जाने का दावा किया था, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई। हालांकि पार्टी के अन्य नेता इस विषय पर खुलकर कुछ भी कहने से बचते रहे। इससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
विपक्षी दलों के हमले
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर भाजपा और जदयू ने उन्हें लगातार निशाने पर रखा। पहले विधानसभा सत्र में उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए, फिर सत्र समाप्त होने के बाद यह आरोप लगाया गया कि नेता प्रतिपक्ष जनता से दूरी बनाए हुए हैं। विपक्षी दलों का कहना रहा कि जब बिहार की जनता कई समस्याओं से जूझ रही है, तब नेता प्रतिपक्ष का विदेश यात्रा पर जाना अनुचित है।
सोशल मीडिया पर तंज
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला सोशल मीडिया तक भी पहुंच गया। हाल ही में भाजपा की ओर से एक पोस्टर जारी किया गया, जिसमें तेजस्वी यादव को लापता बताया गया। पोस्टर में उनके गुम होने को लेकर तंज कसते हुए सवाल उठाए गए कि नेता प्रतिपक्ष आखिर कहां हैं। इस पोस्टर ने सियासी माहौल को और गरमा दिया और सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
आरजेडी के लिए अहम मानी जा रही वापसी
तेजस्वी यादव की वापसी को आरजेडी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में तेजस्वी का सक्रिय होना पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए संदेश देगा कि नेतृत्व अब पूरी तरह मैदान में है।
आने वाले दिनों की सियासत
दिल्ली से पटना तक तेजस्वी यादव की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम मानी जा रही है। उनकी बैठकों और बयानों पर सभी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी वापसी बिहार की राजनीति में किस तरह की नई दिशा और गति लेकर आती है और आरजेडी आने वाले समय में अपनी भूमिका को किस तरह से परिभाषित करती है।

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