January 23, 2026

राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे तेजस्वी, 25 को हो सकता है ऐलान

पटना। बिहार की राजनीति में 25 जनवरी का दिन राष्ट्रीय जनता दल के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन प्रस्तावित राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर और बाहर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि विपक्ष के नेता और राजद के प्रमुख युवा चेहरे तेजस्वी यादव को नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी बैठक में उन्हें पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा हो सकती है। हालांकि, इस पर अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाओं ने पार्टी के अंदर माहौल गर्म कर दिया है।
तेजस्वी यादव को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
राजद के शीर्ष नेतृत्व के करीबी सूत्रों का कहना है कि पार्टी संगठन में बदलाव को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा है। इसी क्रम में तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव लगभग तय माना जा रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो 25 जनवरी को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर फैसला लिया जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि इस मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव स्वयं इस फैसले की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे केवल अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
संगठनात्मक बदलाव की पृष्ठभूमि
राजद में संगठनात्मक फेरबदल की चर्चा कोई नई नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 2024 और 2025 के चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर तेज हुआ। कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन की रणनीति, चुनावी प्रबंधन और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए। ऐसे माहौल में पार्टी नेतृत्व को यह महसूस हुआ कि संगठन को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा देने की जरूरत है। तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की संभावनाएं इसी सोच से जुड़ी मानी जा रही हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारिणी की भूमिका
राजद के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होता है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने का अधिकार नहीं होता, लेकिन यहां महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक प्रस्तावों पर चर्चा की जाती है। ऐसे में 25 जनवरी की बैठक में तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। यदि कार्यकारिणी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है, तो इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से औपचारिक घोषणा की जा सकती है। यही कारण है कि इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर समर्थन और विरोध के स्वर
तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और युवा कार्यकर्ता इस बदलाव के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी को नई पहचान और नई गति मिल सकती है। वहीं कुछ नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के तुरंत बाद ऐसा बड़ा बदलाव करना जल्दबाजी हो सकती है। उनका तर्क है कि पहले हार के कारणों की गहराई से समीक्षा होनी चाहिए और फिर संगठनात्मक बदलाव किए जाने चाहिए।
चुनावी हार के बाद उठे सवाल
पिछले विधानसभा चुनाव में राजद और महागठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी। इस हार के बाद तेजस्वी यादव के नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठे। कुछ नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। इसी पृष्ठभूमि में नेतृत्व परिवर्तन और संगठन को पुनर्गठित करने की बात सामने आई। तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि पार्टी आने वाले चुनावों के लिए खुद को नए सिरे से तैयार कर सके।
युवा नेतृत्व और भविष्य की रणनीति
राजद के भीतर यह भी माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने से पार्टी को युवा नेतृत्व का स्पष्ट संदेश मिलेगा। इससे युवा वोटरों और कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है। साथ ही, पुराने और अनुभवी नेताओं तथा युवा पीढ़ी के बीच संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की भूमिका को मजबूत करने के लिहाज से भी यह कदम रणनीतिक माना जा रहा है।
25 जनवरी की बैठक क्यों है निर्णायक
25 जनवरी को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को राजद के भविष्य के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। यदि इस बैठक में तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पास होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत होगा। इससे साफ होगा कि पार्टी आने वाले समय में नेतृत्व और रणनीति दोनों स्तरों पर बदलाव के लिए तैयार है। वहीं, अगर किसी कारणवश इस प्रस्ताव पर फैसला टलता है या इसे आगे के लिए टाल दिया जाता है, तो पार्टी के भीतर नई बहस और चर्चाओं का दौर शुरू हो सकता है।
फिलहाल इंतजार फैसले का
अभी के लिए राजद के कार्यकर्ता, समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक 25 जनवरी की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं के बीच यह बैठक पार्टी की दिशा और दशा तय करने वाली साबित हो सकती है। अंतिम फैसला क्या होगा, यह तो बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि यह दिन बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ ला सकता है।

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