पीएम के पूर्णिया दौरे पर तेजस्वी का हमला, कहा- शिक्षकों को कंडक्टर बनाया गया, कॉलेज से लेकर सड़क की हालत बेहाल
पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्णिया दौरे को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। प्रधानमंत्री एक दिन के लिए बिहार आ रहे हैं, जहाँ वे हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे और कई योजनाओं की घोषणा करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे से पहले बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो साझा कर प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछे और बिहार की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। तेजस्वी ने प्रधानमंत्री के दौरे को महज़ एक राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए कहा कि बिहार की जनता को इससे कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
जर्जर सड़क, बदहाल अस्पताल और शिक्षकों की समस्याएँ
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे अपनी रैली स्थल से 2-3 किलोमीटर के दायरे में देख लें कि यहाँ की सड़कों की क्या स्थिति है। ग्रामीण सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, स्वास्थ्य केंद्रों में न दवा है न पर्याप्त स्टाफ। महिलाओं और युवाओं की समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। पूर्णिया मेडिकल कॉलेज की हालत इतनी खराब है कि वहां इलाज कराना कठिन हो गया है। तेजस्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री को जुमलों की जगह इन वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक रैली से बिहार पर 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जबकि यही राशि स्कूलों की चारदीवारी, खेल मैदान और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाने में खर्च की जा सकती थी। इसके साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों में दवा और मानव संसाधन की व्यवस्था की जा सकती थी।
शिक्षकों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर स्कूलों में पढ़ाई बंद कर दी जाती है। शिक्षकों को अपने कार्य छोड़कर कंडक्टर बना दिया जाता है ताकि लोगों को रैली में लाया जा सके। सरकारी कर्मचारियों, जीविका दीदियों, आशा और ममता कार्यकर्ताओं, शिक्षा मित्रों, विकास मित्रों और आंगनवाड़ी सेविकाओं को भीड़ जुटाने का टारगेट दिया जाता है। इस प्रक्रिया से न सिर्फ काम प्रभावित होता है बल्कि कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी बढ़ता है। तेजस्वी यादव ने इसे बिहार की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे के साथ अन्याय बताया।
विशेष राज्य का दर्जा – अधूरा वादा
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री से यह भी सवाल पूछा कि क्या उन्हें याद है कि 11.5 साल पहले उन्होंने पूर्णिया से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था। उन्होंने पूछा कि उस वादे का क्या हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव से पहले फिर झूठे वादों और जुमलों के जरिए बिहारवासियों को गुमराह करने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग अब भी पूरी नहीं हुई है और जनता इसका जवाब चाहती है।
जंगल राज का आरोप और केंद्र सरकार की विफलता
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल की विफलताओं को छिपाने के लिए लालू-राबड़ी शासन को “जंगल राज” कहकर प्रचारित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और एनडीए सरकार की असफलताओं को छिपाने के लिए यह केवल एक राजनीतिक नारा है। लेकिन बिहार की जनता अब इन बातों से पूरी तरह अवगत हो चुकी है और फिर से झूठे वादों के जाल में नहीं फँसेगी। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री के दौरे पर सीधे सवाल उठाकर बिहार की जमीनी समस्याओं को उजागर किया है। उन्होंने सड़कों की खराब स्थिति, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली, और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की। साथ ही उन्होंने विशेष राज्य का दर्जा न मिलने और केंद्र सरकार की विफलताओं पर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार बिहार की जनता अब राजनीतिक नारेबाजी से प्रभावित नहीं होगी और असली मुद्दों पर जवाब मांगेगी। इस तरह तेजस्वी का यह बयान प्रधानमंत्री के दौरे को केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं बल्कि बिहार की समस्याओं पर चर्चा का अवसर बनाने का प्रयास है।


