प्रदेश के 6390 शिक्षकों ने ट्रांसफर आवेदन लिया वापस, नई पोस्टिंग से खुश नहीं, स्कूल आवंटन के बाद लिया फैसला
पटना। बिहार में शिक्षकों के ऐच्छिक स्थानांतरण की प्रक्रिया में बड़ा मोड़ आया है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों को स्वैच्छिक स्थानांतरण का विकल्प देने के बाद अब तक 6390 शिक्षकों ने अपना तबादला आवेदन वापस ले लिया है। यह संख्या इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी नई पोस्टिंग से संतुष्ट नहीं हैं या फिर वे अपने पुराने स्कूल में ही कार्यरत रहना चाहते हैं। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा शिक्षकों ने दरभंगा और पश्चिम चंपारण जिलों में अपने स्थानांतरण आवेदन वापस लिए हैं। इन दोनों जिलों से 331-331 शिक्षकों ने आवेदन वापसी की प्रक्रिया को अपनाया। इसके बाद मुजफ्फरपुर से 324, समस्तीपुर से 277 और पटना से 257 शिक्षकों ने भी स्थानांतरण रद्द करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार पूर्वी चंपारण में 252, गया और मधुबनी में 234-234, भागलपुर में 218 तथा सिवान में 216 शिक्षकों ने भी आवेदन वापसी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इन 6390 में से 1307 शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें स्कूल आवंटित किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया। यह दर्शाता है कि शिक्षक स्कूल आवंटन के बाद भी अपने फैसले से संतुष्ट नहीं थे। वहीं 5083 शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें अब तक कोई स्कूल आवंटित नहीं किया गया था, फिर भी उन्होंने स्थानांतरण का विचार त्याग दिया। बिहार सरकार ने दिसंबर 2024 में राज्य भर के शिक्षकों के लिए ऐच्छिक स्थानांतरण की प्रक्रिया आरंभ की थी। इस प्रक्रिया में 1.90 लाख शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जिनमें से 1.30 लाख शिक्षकों को जिला आवंटित किया जा चुका है। वहीं लगभग 50,000 शिक्षकों को स्कूल भी मिल चुका था। लेकिन अब इनमें से हजारों शिक्षक अपना तबादला रद्द करवा चुके हैं, जिससे शिक्षा विभाग के सामने नई स्थिति उत्पन्न हो गई है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ के अनुसार, जिन शिक्षकों को अपनी पोस्टिंग रद्द करनी थी, उनके लिए एक विशेष पोर्टल 5 जून से खोला गया था। इस पोर्टल पर शिक्षक अपने लॉगिन के माध्यम से आवेदन वापस ले सकते थे। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और अपने स्थानांतरण आवेदन को रद्द करवा लिया। शिक्षकों द्वारा तबादला आवेदन वापस लेने का असर उन जिलों पर पड़ेगा, जहां उन्हें भेजा गया था। अब इन जिलों में रिक्तियां बढ़ जाएंगी, जिससे अन्य शिक्षकों को स्थानांतरण का अवसर मिल सकता है। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी शिक्षक अपने आवेदन वापस ले सकते हैं, जिससे रिक्त पदों की संख्या में और वृद्धि होगी। बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष दीपांकर गौरव ने शिक्षा विभाग की इस पहल की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि यह कदम शिक्षकों को अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने का अवसर प्रदान करता है, जो एक लोकतांत्रिक और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण का परिचायक है। इस पूरी प्रक्रिया से स्पष्ट होता है कि शिक्षक तबादले को लेकर सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं और शिक्षा विभाग ने उन्हें विकल्प देकर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह प्रक्रिया अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।


