वैशाली में एसटीएफ–पुलिस मुठभेड़: कुख्यात सोना लुटेरा अभिजीत उर्फ प्रिंस ढेर, कई राज्यों में था वांछित
पटना। वैशाली में एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शुक्रवार को कुख्यात सोना लुटेरे अभिजीत कुमार उर्फ प्रिंस मुठभेड़ में मारा गया। कई राज्यों की पुलिस के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ यह अपराधी बिहार सरकार द्वारा घोषित लाखों रुपये के इनाम का भी फरार आरोपी था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रिंस वैशाली जिले में एक बड़ी सोना लूट की योजना बना रहा था, जिसकी पुख्ता सूचना मिलने के बाद एसटीएफ ने जिला पुलिस के साथ मिलकर विशेष अभियान शुरू किया। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को हाजीपुर के आसपास प्रिंस की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद इलाके में सघन घेराबंदी की गई। जैसे ही एसटीएफ और पुलिस की टीम उसके नजदीक पहुंची, खुद को घिरा देख प्रिंस ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद अभिजीत कुमार उर्फ प्रिंस को गोली लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। मुठभेड़ स्थल से हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद किए जाने की सूचना है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रिंस के खिलाफ बिहार के अलावा ओडिशा समेत कई राज्यों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। सोना लूट की वारदातों में उसका नाम प्रमुख रूप से सामने आता रहा था। वह बेहद शातिर और दुस्साहसी अपराधी माना जाता था, जो अक्सर पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र के हुसैना गांव का रहने वाला अभिजीत कुमार उर्फ प्रिंस शुरू से ही आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा। उसका आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। बताया जाता है कि वह एक बार हाजीपुर जेल में बंद था, लेकिन कोर्ट पेशी के दौरान पुलिसकर्मी की हत्या कर हथकड़ी के साथ फरार हो गया था। इसके बाद उसे दोबारा गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया, जहां इलाज के बहाने उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को नशा खिलाकर वह फिर से फरार हो गया। इस दुस्साहसिक फरारी के बाद उसने ओडिशा में एक बड़ी सोना लूट की वारदात को अंजाम दिया, जिससे उसका नेटवर्क और भी मजबूत होता चला गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रिंस दर्जनों मामलों में वांछित था। सोना लूट, पुलिस पर हमला, हत्या, फरारी और संगठित अपराध जैसी धाराओं में उसके खिलाफ केस दर्ज थे। उसके बढ़ते आतंक को देखते हुए राज्य सरकार ने उस पर लाखों रुपये का इनाम घोषित किया था। बताया जा रहा है कि वह कुख्यात सोना लुटेरा सुबोध गैंग से भी जुड़ा हुआ था और इसी नेटवर्क के जरिए वह अलग-अलग राज्यों में वारदातों को अंजाम देता था। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई। प्रिंस की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी और जैसे ही वैशाली में उसके पहुंचने की सूचना मिली, टीम ने तुरंत ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि प्रिंस के मारे जाने से सोना लूट के संगठित गिरोह को बड़ा झटका लगा है और अपराध की कई कड़ियां अब कमजोर पड़ेंगी।घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल रहा, हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि इस मुठभेड़ से न सिर्फ बिहार बल्कि अन्य राज्यों में सक्रिय सोना लूट गिरोहों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ेगा। पुलिस अब प्रिंस से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच में जुट गई है। उसके संपर्कों, सहयोगियों और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की जा रही है, ताकि गिरोह की बाकी कड़ियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। इस बड़ी सफलता को एसटीएफ की एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे संगठित अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम को नई मजबूती मिली है।


