पहाड़ों में बर्फबारी से प्रदेश में कड़ाके की ठंड, 10 डिग्री से नीचे तापमान, कोल्ड-डे का अलर्ट जारी
पटना। बिहार इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है। पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी का असर अब पूरी तरह से मैदानी इलाकों में दिखाई देने लगा है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फ गिरने से ठंडी हवाओं का प्रवाह उत्तर भारत के मैदानी राज्यों की ओर बढ़ा है। इसका सीधा असर बिहार के मौसम पर पड़ा है, जहां तापमान तेजी से नीचे गिर गया है और लोगों को दिन-रात ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। सुबह और देर रात घर से निकलना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राज्य के अधिकांश जिलों में 10 डिग्री से नीचे तापमान
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मधुबनी जिले को छोड़कर बिहार के लगभग सभी 37 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों में भागलपुर, शेखपुरा, छपरा, किशनगंज और गया जैसे जिलों में न्यूनतम तापमान करीब 7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भागलपुर में तो तापमान और भी नीचे चला गया, जहां 4.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया और यह राज्य का सबसे ठंडा जिला बन गया। लगातार गिरते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।
कोल्ड-डे और घने कोहरे का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को बिहार के सभी जिलों के लिए कोल्ड-डे और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर विजिबिलिटी कुछ मीटर तक सिमट गई, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
पश्चिमी विक्षोभ और पछुआ हवाओं की भूमिका
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी के कारण ठंडी पछुआ हवाएं लगातार बिहार की ओर बढ़ रही हैं। ये हवाएं पाकिस्तान, राजस्थान और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक पहुंच रही हैं। इसी वजह से तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। पछुआ हवाओं की गति बढ़ने से ठंड का असर और तेज हो गया है और कनकनी बढ़ गई है।
अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद नहीं
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। गुरुवार को कई जिलों में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल सकती हैं। इससे खुले इलाकों, खेतों और हाइवे पर ठंड का असर और ज्यादा महसूस होगा। खासकर सुबह और शाम के समय बाहर निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
तापमान में और गिरावट की संभावना
मौसम विभाग की मानें तो अगले चार दिनों में बिहार के न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट हो सकती है। इसके साथ ही अगले 24 घंटों के भीतर अधिकतम तापमान में भी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज होने के आसार हैं। इसका मतलब है कि न सिर्फ रातें बल्कि दिन भी ज्यादा ठंडे हो सकते हैं। धूप निकलने के बावजूद ठंडी हवाओं के कारण ठंड का असर बना रहेगा।
शीत दिवस जैसी स्थिति
अगले तीन दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में शीत दिवस जैसी स्थिति बनी रहने की संभावना जताई गई है। इसका अर्थ है कि दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहेगा और धूप का असर भी कमजोर रहेगा। सर्द हवाओं के कारण लोगों को दिन में भी ठिठुरन महसूस होगी। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव
हालांकि बुधवार को कुछ जिलों में न्यूनतम तापमान में शून्य से चार डिग्री सेल्सियस तक की हल्की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई थी, लेकिन यह राहत अस्थायी मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और ठंड का कुल असर अभी भी बना रहेगा। आने वाले दिनों में तापमान फिर से नीचे जा सकता है।
जनजीवन पर असर
कड़ाके की ठंड के कारण आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। सुबह-सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे, खेतों में काम करने वाले मजदूर और सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग ठंड से परेशान नजर आ रहे हैं। कई जिलों में अलाव का सहारा लिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में पशुपालक भी अपने पशुओं को ठंड से बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं।
सावधानी और सतर्कता की जरूरत
मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ठंड के इस दौर में सावधानी बरतें। अनावश्यक रूप से सुबह और देर रात बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़ों का उपयोग करें और कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता रखें। अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही रहने की संभावना है, इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बेहतर उपाय है।


