प्रशासन ने पीके को नहीं बल्कि लोकतंत्र को मारा थप्पड़, चुनाव में मिलेगा हिसाब : अख्तरुल ईमान
पटना। बिहार में 70वीं बीपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का आमरण अनशन और उनकी गिरफ्तारी पर सियासी माहौल गरमा गया है। इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी प्रशांत किशोर का समर्थन करते हुए बिहार सरकार की कड़ी आलोचना की है। एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि बिहार सरकार दमनकारी नीति अपना रही है।
लोकतंत्र को थप्पड़ मारने का आरोप
अख्तरूल ईमान ने कहा कि अगर प्रशांत किशोर को पुलिस द्वारा थप्पड़ मारा गया है, जैसा कि तस्वीरों में दिख रहा है, तो यह सिर्फ प्रशांत किशोर पर नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य से बिहार सरकार की नीयत और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा होता है।
बीपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं पर सरकार को घेरा
अख्तरूल ईमान ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों को गंभीरता से उठाया और कहा कि छात्रों की मांग जायज है। एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष ने बीपीएससी चेयरमैन पर भी कई आरोप लगाए और कहा कि सरकार इन मुद्दों को नजरअंदाज कर दमनकारी कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एआईएमआईएम बीपीएससी अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन करता है और परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की मांग करता है। अख्तरूल ईमान ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को विरोध करने और आंदोलन करने का अधिकार है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशांत किशोर के शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे मुद्दों पर चुप न रहें और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं।
चुनाव में मिलेगा जवाब
अख्तरूल ईमान ने बिहार सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस दमनकारी नीति का खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार गंगा जल से धुली हुई नहीं है, बल्कि उनके दामन पर कई दाग हैं। एआईएमआईएम नेता ने यह भी कहा कि छात्रों और जनता का आक्रोश अब सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन बन सकता है। अख्तरूल ईमान के बयान से यह स्पष्ट है कि 70वीं बीपीएससी परीक्षा को लेकर उठे विवाद में सियासत और तेज हो चुकी है। एआईएमआईएम ने न केवल प्रशांत किशोर के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है, बल्कि सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का गंभीर आरोप भी लगाया है। इस मामले में आगे क्या मोड़ आता है, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन यह साफ है कि बिहार में सरकार और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ने वाला है।


