January 23, 2026

भारत में पहली बार 3 लाख के पार हुई चांदी की कीमतें, सर्राफा बाजार में भारी छलांग, शेयर मार्केट में रिकॉर्ड तेजी

नई दिल्ली। चांदी की कीमतों में सोमवार 19 जनवरी को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। इसमें एक ही दिन में 14 हजार रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। इससे पहले शुक्रवार को एमसीएक्स पर चांदी का भाव करीब 2.87 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास था। इस रिकॉर्ड बढ़त के बाद निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों में हलचल तेज हो गई है, वहीं बाजार विशेषज्ञ इसे वैश्विक मांग, आपूर्ति संकट और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का नतीजा मान रहे हैं। वहीं देश के सर्राफा बाजार में भी चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया है। सोमवार को सर्राफा बाजार में चांदी लगभग 12 हजार रुपये की तेजी के साथ 2.94 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार करती देखी गई। यानी वायदा बाजार के साथ-साथ हाजिर बाजार में भी कीमतों का रुख मजबूत बना हुआ है। पिछले कुछ महीनों में चांदी के भाव की रफ्तार काफी तेज रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एमसीएक्स पर 15 दिसंबर 2025 के आसपास चांदी पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद महज एक महीने के भीतर चांदी ने 2 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक की दूरी तय कर ली। बाजार के जानकारों के मुताबिक यह तेजी ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि चांदी को 1 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंचने में लगभग 9 महीने का समय लगा था, जबकि 50 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंचने में करीब 14 वर्ष लग गए थे। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में मौजूदा दौर में असाधारण तेजी का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी अब केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ती तकनीकी और ऊर्जा जरूरतों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सोलर पैनल (सौर ऊर्जा पैनल), इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी (विद्युत वाहन) और फाइव-जी टेक्नोलॉजी (पांचवीं पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक) में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है। पूरी दुनिया में ग्रीन एनर्जी यानी हरित ऊर्जा पर जोर बढ़ने के कारण औद्योगिक मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके उलट चांदी की सप्लाई यानी आपूर्ति उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही है। कई देशों में पर्यावरण नियमों के कारण योजनाबद्ध खनन (प्लान्ड माइनिंग) कम हो गया है। साथ ही चांदी का उत्पादन पूरी तरह स्वतंत्र रूप से नहीं होता, बल्कि करीब 70 प्रतिशत चांदी कॉपर और जिंक जैसी दूसरी धातुओं की खुदाई के दौरान सह-उत्पाद (बाई प्रोडक्ट) के रूप में निकलती है। ऐसे में जब तक तांबे जैसी धातुओं की खुदाई नहीं बढ़ती, चांदी की आपूर्ति बढ़ाना मुश्किल है। इसी कारण मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर बना हुआ है और बाजार में चांदी की कमी की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती महंगाई भी चांदी की कीमतों को मजबूत बना रहे हैं। जानकारों के अनुसार जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक शेयर बाजार की तुलना में सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसी कारण कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा है, जिससे चांदी की कीमतों में अतिरिक्त सहारा मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें डॉलर में तय होती हैं। इसलिए डॉलर इंडेक्स (डॉलर सूचकांक) की चाल भी चांदी के भाव पर असर डालती है। बताया गया है कि डॉलर इंडेक्स 109 के उच्च स्तर से गिरकर 98 के आसपास आ गया है। डॉलर के कमजोर होने का मतलब है कि चांदी जैसी वस्तुएं तुलनात्मक रूप से सस्ती दिखती हैं, जिससे मांग बढ़ जाती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक चांदी में आगे भी तेजी की संभावना बनी हुई है। अनुमान है कि 2026 में चांदी 3.20 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि सोलर और ईवी सेक्टर की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए कीमतों में आने वाली हर छोटी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी ब्रेकआउट (तकनीकी संकेतों के आधार पर तेज उछाल) और मजबूत वैश्विक संकेतों के कारण चांदी 3.94 लाख रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच सकती है। इतना ही नहीं, ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती के चलते चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकती है, जो भारतीय कीमत के हिसाब से करीब 3.5 से 4 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास बैठता है। कुछ रिपोर्टों में यह भी संभावना जताई जा रही है कि डॉलर की कमजोरी और महंगाई के दबाव के कारण 2026 में चांदी 200 डॉलर प्रति औंस के आश्चर्यजनक स्तर तक भी जा सकती है। चांदी में इस समय लंबी अवधि की तेजी का दौर जारी माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मांग और आपूर्ति के अंतर, वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार की चाल के कारण चांदी में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी सलाह दी जा रही है कि किसी भी बड़े निवेश से पहले अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ की राय जरूर लें।

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