सरस्वती पूजा के लिए पटना में बनाए जाएंगे सात कृत्रिम तालाब, नियम उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना
पटना। सरस्वती पूजा के अवसर पर राजधानी पटना में इस बार मूर्ति विसर्जन को लेकर विशेष और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था की जा रही है। गंगा नदी और अन्य जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से पटना नगर निगम ने शहर के अलग-अलग घाटों पर सात कृत्रिम तालाब बनाने का निर्णय लिया है। इन आर्टिफिशियल तालाबों में ही देवी सरस्वती की प्रतिमाओं और पूजा सामग्री का विसर्जन किया जाएगा। नगर निगम ने साफ किया है कि तय स्थानों के अलावा कहीं और विसर्जन करने पर संबंधित लोगों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर नगर निगम की पहल
सरस्वती पूजा के दौरान बड़ी संख्या में मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। अक्सर यह विसर्जन सीधे नदियों या तालाबों में होता है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है। इसी समस्या को देखते हुए पटना नगर निगम ने इस वर्ष कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था की है। इन तालाबों में नियंत्रित तरीके से विसर्जन होने से नदी और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की स्वच्छता बनी रहेगी।
कहां-कहां बनाए जा रहे हैं कृत्रिम तालाब
नगर निगम की ओर से शहर के विभिन्न अंचलों में कुल सात आर्टिफिशियल तालाब बनाए जा रहे हैं। बांकीपुर अंचल में लॉ कॉलेज घाट पर एक तालाब बनाया जाएगा। पाटलिपुत्र अंचल में पाटीपुल घाट और मीनार घाट पर तालाब तैयार किए जा रहे हैं। अजीमाबाद अंचल में घाट और मित्तन घाट पर भी कृत्रिम तालाब की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पटना सिटी अंचल में कंगन घाट और दमराही घाट पर तालाब बनाए जा रहे हैं। इन सभी स्थानों का चयन इस तरह किया गया है कि पूजा समितियों और श्रद्धालुओं को विसर्जन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम
नगर निगम की ओर से इन आर्टिफिशियल तालाबों के आसपास कपड़े से बैरिकेडिंग की जाएगी, ताकि विसर्जन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। साथ ही रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से मूर्ति विसर्जन कर सकेंगे। नगर निगम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तालाबों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित घाटों और कृत्रिम तालाबों के अलावा किसी अन्य स्थान पर मूर्ति या पूजा सामग्री का विसर्जन करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों या पूजा समितियों पर जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसका उद्देश्य लोगों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना है।
गंगा और अन्य जलस्रोतों को बचाने की कोशिश
पटना शहर से होकर बहने वाली गंगा नदी न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। हर साल त्योहारों के दौरान बड़ी मात्रा में मूर्तियों और पूजा सामग्री के विसर्जन से नदी का जल प्रदूषित होता है। नगर निगम की यह पहल गंगा समेत अन्य जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इसके तहत सरस्वती पूजा के दौरान विशेष सफाई अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि घाटों और आसपास के इलाकों में गंदगी न फैले।
प्लास्टिक मुक्त पूजा पर जोर
सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना नगर निगम ने इस बार प्लास्टिक मुक्त आयोजन पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए नगर निगम की जागरूकता टीमें घाटों और पूजा स्थलों पर तैनात रहेंगी। ये टीमें श्रद्धालुओं और पूजा समितियों को प्लास्टिक रैपर, पॉलीथिन और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के इस्तेमाल से बचने के लिए प्रेरित करेंगी। लोगों को फूल, पत्ते और अन्य जैविक सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी जाएगी, जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।
पूजा समितियों से सहयोग की अपील
नगर निगम ने सभी पूजा समितियों और आयोजकों से अपील की है कि वे सरस्वती पूजा का आयोजन पूरी तरह से पर्यावरणीय दायित्व के साथ करें। मूर्तियों का विसर्जन केवल तय किए गए कृत्रिम तालाबों में ही करें और पूजा के बाद बची सामग्री को इधर-उधर न फेंकें। नगर निगम का मानना है कि प्रशासन और आम लोगों के सहयोग से ही शहर को स्वच्छ और सुंदर रखा जा सकता है।
स्वच्छ शहर की दिशा में एक कदम
पटना नगर निगम की यह पहल केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ शहर और पर्यावरण संरक्षण की दीर्घकालिक सोच को दर्शाती है। कृत्रिम तालाबों के जरिए विसर्जन की व्यवस्था से न सिर्फ जल प्रदूषण कम होगा, बल्कि भविष्य में अन्य त्योहारों के लिए भी एक बेहतर मॉडल तैयार होगा।
आम लोगों की भूमिका भी अहम
नगर निगम की तैयारियां तभी सफल होंगी, जब आम लोग और पूजा समितियां नियमों का पालन करेंगी। यदि श्रद्धालु निर्धारित स्थलों पर ही विसर्जन करें, प्लास्टिक का उपयोग न करें और स्वच्छता का ध्यान रखें, तो सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक आस्था का पर्व बनेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी। सरस्वती पूजा के लिए पटना में सात कृत्रिम तालाब बनाने का फैसला शहर को स्वच्छ रखने और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सख्त नियम, जागरूकता अभियान और प्रशासनिक निगरानी के जरिए नगर निगम यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूजा उल्लास के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी निभाई जाए।


