पटना में स्कूलों की टाइमिंग बदली, सुबह 9 बजे से होगा संचालन, 20 जनवरी तक आदेश लागू
पटना। ठंड और शीतलहर के कारण प्रभावित हुई शिक्षा व्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। पटना जिले में लंबे समय से जारी स्कूल बंदी के बाद जिला प्रशासन ने सभी कक्षाओं के संचालन की अनुमति दे दी है। हालांकि बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की टाइमिंग में अस्थायी बदलाव किया गया है। नए आदेश के तहत जिले के सभी सरकारी, निजी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में कक्षाएं सुबह 9 बजे के बाद ही संचालित होंगी। यह व्यवस्था फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगी।
ठंड के बाद शिक्षा व्यवस्था की बहाली
जनवरी की शुरुआत में बिहार, खासकर पटना और आसपास के जिलों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने आम जनजीवन के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया था। सुबह और रात के समय तापमान में भारी गिरावट के कारण छोटे बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन स्कूलों में पढ़ाई पर रोक लगा दी थी। अब मौसम में हल्की राहत मिलने के बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि पढ़ाई को फिर से पूरी तरह शुरू किया जाए।
जिलाधिकारी का आदेश और नई व्यवस्था
पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में भी शैक्षणिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाती है। साथ ही यह शर्त भी जोड़ी गई है कि किसी भी स्थिति में सुबह 9 बजे से पहले कक्षाएं संचालित नहीं होंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे बच्चों को सुबह की ठिठुरन और घने कोहरे से राहत मिलेगी।
20 जनवरी तक लागू रहेगा समय परिवर्तन
स्कूलों की बदली हुई टाइमिंग फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि मौसम की स्थिति में और सुधार होता है, तो आगे चलकर स्कूलों की टाइमिंग को लेकर अतिरिक्त राहत दी जा सकती है। यानी आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा कि स्कूल अपने पुराने समय पर लौटें या नहीं।
कैसे लगी थी स्कूलों पर पाबंदी
ठंड बढ़ने के साथ ही जिला प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से स्कूलों पर पाबंदी लगाई थी। सबसे पहले आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया था। यह रोक 11 जनवरी तक प्रभावी रही। इसके बाद 12 जनवरी से कक्षा छह से आठ तक के विद्यालय खोलने की अनुमति दी गई, जबकि कक्षा पांच तक की पढ़ाई पर रोक बनी रही। फिर 14 जनवरी से कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों को खोलने की इजाजत मिली, लेकिन प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों के लिए छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक पूरी तरह हटा दी गई है।
अभिभावकों और छात्रों को मिली राहत
स्कूल खुलने के फैसले से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से बच्चे घर पर ही पढ़ाई कर रहे थे, जिससे पढ़ाई का नियमित माहौल प्रभावित हो रहा था। कई अभिभावकों का मानना है कि स्कूल खुलने से बच्चों की दिनचर्या फिर से सामान्य होगी और उनकी पढ़ाई में निरंतरता आएगी। वहीं छात्रों में भी स्कूल लौटने को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, खासकर उन बच्चों में जो लंबे समय से अपने दोस्तों और शिक्षकों से दूर थे।
शिक्षकों के लिए भी नई शुरुआत
शिक्षकों के लिए भी यह आदेश राहत लेकर आया है। लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के कारण पाठ्यक्रम पूरा करने को लेकर चिंता बनी हुई थी। अब सभी कक्षाएं शुरू होने से शिक्षक शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई को आगे बढ़ा सकेंगे। हालांकि उन्हें भी यह निर्देश दिया गया है कि बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए और ठंड से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाए जाएं।
बच्चों की सेहत पर विशेष जोर
प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए। ठंड के मौसम को देखते हुए स्कूलों में खुले स्थानों पर लंबे समय तक बच्चों को बैठाने से बचने, जरूरत पड़ने पर ही सुबह की असेंबली आयोजित करने और कक्षाओं को यथासंभव बंद कमरों में संचालित करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, बच्चों को गर्म कपड़े पहनकर स्कूल आने के लिए भी प्रेरित किया गया है।
मौसम और शिक्षा के बीच संतुलन
पटना समेत बिहार के कई जिलों में जनवरी का महीना ठंड के लिहाज से सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रहती है कि बच्चों की सेहत और उनकी पढ़ाई के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इस बार स्कूलों की टाइमिंग बदलकर सुबह 9 बजे के बाद करने का फैसला इसी संतुलन का प्रयास माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है फैसला
प्रशासन ने साफ किया है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि ठंड और शीतलहर का असर पूरी तरह खत्म हो जाता है, तो स्कूलों की टाइमिंग को लेकर नए सिरे से विचार किया जाएगा। वहीं अगर ठंड दोबारा बढ़ती है, तो एहतियातन फिर से कुछ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। पटना जिले में स्कूलों की टाइमिंग बदलने का फैसला बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक संतुलित कदम है। इससे न केवल पढ़ाई फिर से सुचारू रूप से शुरू हो पाई है, बल्कि ठंड के असर से बच्चों को बचाने की कोशिश भी की गई है। आने वाले दिनों में मौसम के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।


