प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों के लिए नियम हुए सख्त, मान्यता की नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी
पटना। बिहार में लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई निजी स्कूल बिना पर्याप्त संसाधनों और नियमों का पालन किए मनमाने ढंग से संचालित हो रहे हैं। अब राज्य सरकार ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं कक्षा तक चलने वाले निजी स्कूलों की मान्यता के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया लागू की है। इस एसओपी के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई स्कूल तय मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी।
नई एसओपी लागू करने का उद्देश्य
शिक्षा विभाग के अनुसार, नई मानक संचालन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करना है। सरकार का मानना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समान शिक्षा का अधिकार तभी सुनिश्चित हो सकता है, जब निजी स्कूल भी तय नियमों और मानकों का पालन करें। इस पहल से न केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
मान्यता से पहले जिला स्तर पर जांच
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी निजी स्कूल को मान्यता देने से पहले जिला स्तर पर जांच की जाएगी। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति स्कूल में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या, बुनियादी ढांचे, शैक्षणिक संसाधनों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जांच करेगी। समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि स्कूल को मान्यता दी जाएगी या नहीं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति के आधार पर स्कूलों को मान्यता मिले।
कक्षा एक से पांच तक शिक्षकों की अनिवार्य संख्या
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एसओपी में कक्षा एक से पांच तक के लिए छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की न्यूनतम संख्या तय की गई है। यदि किसी स्कूल में 60 छात्र नामांकित हैं, तो वहां कम से कम दो शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी होगी। 61 से 90 छात्रों पर तीन शिक्षक, 91 से 120 छात्रों पर चार शिक्षक और 121 से 200 छात्रों पर पांच शिक्षकों की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसके अलावा, यदि स्कूल में 150 से अधिक छात्र हैं, तो पांच शिक्षकों के साथ एक प्रधानाध्यापक या प्रिंसिपल की नियुक्ति भी जरूरी होगी।
छात्र-शिक्षक अनुपात के नए नियम
यदि किसी स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का नामांकन है, तो प्रधानाध्यापक को छोड़कर छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक नहीं होना चाहिए। यानी हर 40 छात्रों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है। सरकार का मानना है कि बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात से बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान मिलेगा और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा।
कक्षा छह से आठ के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
नई एसओपी में कक्षा छह से आठ तक के लिए भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। इसके अनुसार, हर कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की नियुक्ति जरूरी होगी। विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के शिक्षक होना अनिवार्य किया गया है। यह भी तय किया गया है कि प्रत्येक 35 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था होनी चाहिए। जिस स्कूल में कुल नामांकित छात्रों की संख्या 100 से अधिक है, वहां पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति भी जरूरी होगी।
अतिरिक्त विषयों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था
सरकार ने केवल मुख्य विषयों तक ही नियम सीमित नहीं रखे हैं। एसओपी में कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा के लिए भी शिक्षकों की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहे।
बुनियादी ढांचे को लेकर सख्त प्रावधान
नई मानक संचालन प्रक्रिया में निजी स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। हर शिक्षक के लिए कम से कम एक कक्षा कक्ष का होना जरूरी होगा। इसके साथ ही प्रधानाध्यापक के लिए कार्यालय और स्कूल में भंडार कक्ष की व्यवस्था भी अनिवार्य कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल तक बच्चों की पहुंच में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। स्कूल परिसर में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय, सुरक्षित पेयजल की सुविधा, मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए रसोई, खेल का मैदान और चारदीवारी का होना आवश्यक होगा।
पढ़ाई के दिन और घंटों का निर्धारण
एसओपी में शिक्षण सत्र और पढ़ाई के घंटों को भी स्पष्ट रूप से तय किया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों को एक साल में कम से कम 200 दिन पढ़ाया जाना अनिवार्य होगा। वहीं छठी से आठवीं कक्षा के लिए 220 दिन की पढ़ाई तय की गई है। पढ़ाई के घंटों की बात करें तो पहली से पांचवीं कक्षा के लिए प्रति वर्ष 800 घंटे और छठी से आठवीं के लिए 1000 घंटे की पढ़ाई अनिवार्य होगी। इसके अलावा, शिक्षकों के लिए प्रति सप्ताह अधिकतम 45 शिक्षण घंटे निर्धारित किए गए हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई मानक संचालन प्रक्रिया से निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा। बच्चों को सुरक्षित, अनुशासित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। साथ ही, इस सख्ती से उन स्कूलों पर भी लगाम लगेगी जो बिना मान्यता या अधूरी सुविधाओं के साथ संचालित हो रहे हैं। कुल मिलाकर, यह पहल बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


