रोहिणी का नीतीश पर तंज, कहा- ये समृद्धि यात्रा नहीं, चाचा की विदाई यात्रा, अब सीएम ही कर रहे पलायन

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार से अपनी समृद्धि यात्रा की शुरुआत की है। इस यात्रा के जरिए वे राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा और जनता से संवाद करने वाले हैं। हालांकि मुख्यमंत्री की इस यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर कई पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा को ‘विदाई यात्रा’ करार दिया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
रोहिणी आचार्य ने यात्रा पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा का नाम समृद्धि यात्रा नहीं बल्कि विदाई यात्रा रखना चाहिए था। उन्होंने लिखा कि लगभग बीस वर्षों तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने के बावजूद यदि बिहार को समृद्ध नहीं बनाया जा सका, तो फिर इस यात्रा को समृद्धि यात्रा कहना उचित नहीं है। उन्होंने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस यात्रा को विदाई यात्रा कहते तो यह अधिक उपयुक्त होता। रोहिणी आचार्य का कहना था कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद राज्य के विकास को लेकर किए गए दावे पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए हैं।
नीति आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार बिहार अभी भी देश के सबसे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में शामिल है। उनका कहना था कि राज्य में गरीबी दर अभी भी अधिक है और प्रति व्यक्ति आय देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास की गति धीमी है और बुनियादी ढांचे के विकास में भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। रोहिणी आचार्य ने यह भी दावा किया कि राज्य की बड़ी आबादी अभी भी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने को मजबूर है। उनके अनुसार नीति आयोग की रिपोर्ट बिहार की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है और इससे सरकार के विकास संबंधी दावों पर सवाल खड़े होते हैं।
पलायन के मुद्दे पर भी साधा निशाना
रोहिणी आचार्य ने एक अन्य पोस्ट में बिहार से हो रहे पलायन के मुद्दे को लेकर भी मुख्यमंत्री पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी दलों ने दावा किया था कि सरकार बनने के बाद राज्य से पलायन रुक जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब स्थिति यह हो गई है कि पलायन रोकने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री खुद ही राज्य से पलायन करने जा रहे हैं। उनके इस बयान को मुख्यमंत्री की राजनीतिक भूमिका और भविष्य को लेकर किया गया व्यंग्य माना जा रहा है।
समृद्धि यात्रा का उद्देश्य
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई समृद्धि यात्रा का उद्देश्य राज्य में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करना और विभिन्न जिलों में विकास कार्यों की स्थिति का आकलन करना बताया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेंगे। सरकार का कहना है कि इस यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद करेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि सरकार की योजनाएं लोगों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
मुख्यमंत्री की यात्रा शुरू होते ही विपक्षी दलों की ओर से बयानबाजी भी तेज हो गई है। रोहिणी आचार्य के बयान को इसी क्रम में देखा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में कई विकास संबंधी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं और सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल का कहना है कि मुख्यमंत्री की यात्रा का उद्देश्य विकास कार्यों को और तेज करना और जनता की समस्याओं को सीधे सुनना है।
बिहार की राजनीति में बढ़ी गर्माहट
रोहिणी आचार्य के बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे आगामी चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखे होते जाएंगे। विपक्षी दल सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहा है।
आगे भी जारी रह सकती है सियासी बयानबाजी
समृद्धि यात्रा को लेकर शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। वहीं विपक्षी दल भी इस दौरान सरकार की नीतियों और दावों पर सवाल उठाते रहेंगे। ऐसे में यह साफ है कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा केवल प्रशासनिक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि राजनीतिक चर्चा का भी केंद्र बन गई है।

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