January 16, 2026

रोहिणी का तेजस्वी पर हमला, कहा- समीक्षा का दिखावा करने से बेहतर है आत्ममंथन करना

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भीतर मंथन और अंतर्विरोध दोनों ही खुलकर सामने आने लगे हैं। शुक्रवार को पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास पर पार्टी की पहली औपचारिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सांसदों और कोर कमेटी के सदस्यों ने शिरकत की। बैठक में संगठनात्मक कमजोरियों, चुनावी रणनीति और आगामी बजट सत्र को लेकर सरकार को घेरने की रूपरेखा पर चर्चा हुई। लेकिन इसी बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर सियासी हलचल और तेज कर दी। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर तेजस्वी यादव पर सीधा निशाना साधते हुए लिखा कि केवल समीक्षा बैठकें कर लेने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “समीक्षा का दिखावा करने से बेहतर है खुद आत्ममंथन करना और जिम्मेदारी लेना।” रोहिणी ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि पार्टी में कब्जा जमाए बैठे ‘गिद्धों’ को ठिकाने लगाने का साहस दिखाए बिना किसी भी समीक्षा की कोई सार्थकता नहीं रह जाती। रोहिणी के इस बयान को सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व और उनके करीबी नेताओं पर हमला माना जा रहा है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे लोग हैं, जो न केवल संगठन को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि लालू यादव की राजनीतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रोहिणी ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक ऐसे तत्वों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पार्टी का आत्ममंथन अधूरा ही रहेगा। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव और आरजेडी नेतृत्व पर सवाल उठाए हों। बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही परिवार और पार्टी के भीतर चल रहा तनाव खुलकर सामने आ गया है। रोहिणी पहले भी सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए यह आरोप लगा चुकी हैं कि पार्टी और परिवार—दोनों ही स्तरों पर उनके साथ अन्याय हुआ है। उनका कहना रहा है कि कुछ चुनिंदा नेता और सलाहकार पार्टी पर हावी हैं और गलत फैसलों के जरिए आरजेडी को लगातार कमजोर कर रहे हैं। आरजेडी सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में चुनावी हार के कारणों पर गंभीर चर्चा की गई। संगठन की जमीनी कमजोरी, टिकट वितरण में हुई चूक, गठबंधन समन्वय और प्रचार रणनीति पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक की अध्यक्षता करते हुए तेजस्वी यादव ने नेताओं से खुलकर अपनी बात रखने को कहा और भरोसा दिलाया कि पार्टी अपनी कमियों से सीख लेकर आगे की रणनीति तय करेगी। आगामी बजट सत्र में सरकार को घेरने और जनहित के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने पर भी सहमति बनी। हालांकि, रोहिणी आचार्य के ताजा बयान ने इस पूरी कवायद पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व संकट और उजागर हो रहा है। एक ओर जहां तेजस्वी यादव खुद को पार्टी का सर्वमान्य नेता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परिवार के भीतर से ही उठ रही आवाजें उनके लिए चुनौती बनती जा रही हैं। रोहिणी ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि पार्टी में फैसले कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गए हैं। उन्होंने तेजस्वी के करीबी नेताओं और सलाहकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हीं की वजह से पार्टी लगातार गलत दिशा में जा रही है। उनका यह बयान आरजेडी के भीतर नेतृत्व की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि चुनावी हार के बाद आरजेडी सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि आंतरिक संकट से भी जूझ रही है। जहां एक ओर नेतृत्व समीक्षा और संगठन को मजबूत करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवार के भीतर से उठ रही असहमति पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तेजस्वी यादव इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या पार्टी के भीतर एकजुटता कायम रख पाते हैं या नहीं।

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