January 16, 2026

रितेश पांडे ने जन सुराज से दिया इस्तीफा, सोशल मीडिया से की घोषणा, छोड़ी राजनीति

पटना। भोजपुरी फिल्म और संगीत जगत के चर्चित नाम रितेश पांडे ने राजनीति से दूरी बनाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह घोषणा की कि वे जन सुराज पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं और सक्रिय राजनीति को अलविदा कह रहे हैं। रितेश पांडे का यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है, जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद चुनावी राजनीति में उतरे कई कलाकार अपने भविष्य को लेकर आत्ममंथन कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ खुलासा
रितेश पांडे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए जन सुराज पार्टी से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक होने के नाते उन्होंने लोकतंत्र के महापर्व में भाग लेने का निर्णय लिया था। चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि उन्होंने ईमानदारी से अपना प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे उसी ईमानदारी के साथ समाज और अपने प्रशंसकों की सेवा अपने कार्यों के माध्यम से करते रहेंगे।
चुनावी अनुभव और करगहर सीट
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रितेश पांडे ने जन सुराज पार्टी की ओर से करगहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। यह उनके राजनीतिक जीवन की पहली बड़ी परीक्षा थी। चुनाव प्रचार के दौरान वे लगातार जनता के बीच रहे, जनसभाएं कीं और बदलाव की बात कही। हालांकि, चुनाव परिणाम उनके अनुकूल नहीं रहे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसी हार के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे राजनीति में आगे क्या रुख अपनाएंगे।
राजनीति से मोहभंग की वजह
अपने बयान में रितेश पांडे ने साफ तौर पर संकेत दिया कि किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर काम करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। उनका मानना है कि राजनीति में रहते हुए स्वतंत्र रूप से काम करने और अपने तरीके से समाज सेवा करना आसान नहीं होता। यही वजह रही कि उन्होंने पार्टी से अलग होने और राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया। उनके इस कदम को एक तरह से आत्ममंथन और यथार्थ स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।
कलाकारों की राजनीति में मुश्किल राह
रितेश पांडे का यह फैसला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। इससे पहले भोजपुरी के बड़े स्टार खेसारी लाल यादव भी राजनीति से दूरी बना चुके हैं। खेसारी लाल यादव ने छपरा से राजद की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें भी करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राजनीति उनके लिए नहीं बनी है। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोकप्रियता और स्टारडम राजनीति में सफलता की गारंटी बन सकता है।
लोकप्रियता और वोट के बीच अंतर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी कलाकार की लोकप्रियता उसे चुनाव मैदान में पहचान जरूर दिला सकती है, लेकिन वोट में बदलना एक अलग चुनौती होती है। रितेश पांडे और खेसारी लाल जैसे कलाकारों की हार यह दिखाती है कि जनता चुनाव के समय केवल प्रसिद्धि नहीं, बल्कि संगठन, मुद्दे और राजनीतिक अनुभव को भी महत्व देती है। यही कारण है कि कई बार बड़े नाम भी चुनावी राजनीति में टिक नहीं पाते।
रितेश पांडे का भविष्य का रास्ता
राजनीति से इस्तीफा देने के बाद रितेश पांडे अब अपने मूल क्षेत्र यानी संगीत और अभिनय पर पूरी तरह फोकस करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में संकेत दिया है कि वे समाज की सेवा कला और अपने कार्यों के जरिए जारी रखेंगे। भोजपुरी संगीत और सिनेमा में उनकी मजबूत पहचान है और उनके चाहने वालों की संख्या भी काफी बड़ी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि वे एक बार फिर पूरी ऊर्जा के साथ अपने रचनात्मक क्षेत्र में लौटेंगे।
जन सुराज पार्टी पर असर
रितेश पांडे के इस्तीफे को जन सुराज पार्टी के लिए भी एक झटका माना जा रहा है। चुनाव के दौरान पार्टी ने कई नए और चर्चित चेहरों को मैदान में उतारा था, ताकि युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ा जा सके। रितेश पांडे जैसे लोकप्रिय चेहरे के राजनीति से बाहर होने से पार्टी की रणनीति पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
राजनीति और आत्ममंथन
रितेश पांडे का यह फैसला इस बात की याद दिलाता है कि राजनीति केवल चुनाव लड़ने या भाषण देने तक सीमित नहीं है। यह निरंतर संघर्ष, संगठन और समझौते की मांग करती है। हर व्यक्ति इसके लिए खुद को अनुकूल नहीं पाता। रितेश पांडे ने यह स्वीकार कर लिया कि सक्रिय राजनीति उनके स्वभाव और कार्यशैली के अनुकूल नहीं है। भोजपुरी गायक और अभिनेता रितेश पांडे का जन सुराज से इस्तीफा और राजनीति से दूरी बनाना बिहार की राजनीति में कलाकारों की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म देता है। यह दिखाता है कि चुनावी हार के बाद आत्ममंथन कर सही समय पर सही निर्णय लेना भी एक जिम्मेदार कदम हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रितेश पांडे अपने कला क्षेत्र में किस नए रूप में सामने आते हैं और राजनीति से बाहर रहकर समाज से उनका जुड़ाव किस तरह आगे बढ़ता है।

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