January 16, 2026

पटना में आरसीपी के समर्थन में जदयू ऑफिस के बाहर लगा पोस्टर, वापसी की तेज हुई अटकलें, औपचारिक घोषणा बाकी

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इसके केंद्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय के बाहर उनके समर्थन में लगे पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद यह अटकलें और मजबूत हो गई हैं कि आरसीपी सिंह जल्द ही जदयू में वापसी कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह इसे बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर
राजधानी पटना में जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम संकेत माने जा रहे हैं। इन पोस्टरों में लिखा गया है कि जदयू परिवार में वरिष्ठ नेता आरसीपी सिंह और बड़े भाई इंजीनियर निशांत कुमार का हार्दिक स्वागत है। बताया जा रहा है कि ये पोस्टर युवा नेता प्रिंस राज की ओर से लगाए गए हैं। पोस्टरों में जिस तरह खुले तौर पर स्वागत संदेश दिया गया है, उससे यह साफ झलकता है कि पार्टी के भीतर आरसीपी सिंह की वापसी को लेकर माहौल तैयार किया जा चुका है।
वापसी की अटकलें क्यों तेज हुईं
आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की चर्चाएं अचानक नहीं उठी हैं। पिछले कुछ महीनों से उनके राजनीतिक रुख में आए बदलाव ने इन अटकलों को लगातार मजबूती दी है। हाल ही में पटना के पटेल भवन में आयोजित चूड़ा-दही भोज के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खुलकर तारीफ की थी। उन्होंने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताते हुए कहा था कि बिहार के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह माना जाने लगा कि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच रिश्तों में फिर से गर्माहट आ रही है।
जदयू नेतृत्व का रुख
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जदयू के शीर्ष नेतृत्व ने आरसीपी सिंह की वापसी को लेकर अब कोई आपत्ति नहीं जताई है। पहले पार्टी के अंदर उनके खिलाफ जो विरोध के स्वर सुनाई देते थे, वे अब लगभग खत्म हो चुके हैं। वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने सार्वजनिक रूप से यह कहकर इन अटकलों को और हवा दी कि जदयू आरसीपी सिंह का अपना घर है और वे कभी भी वापस आ सकते हैं। इस बयान को पार्टी के भीतर सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ललन सिंह की भूमिका और औपचारिक घोषणा
सूत्रों के अनुसार, आरसीपी सिंह की वापसी की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह के इजराइल दौरे से लौटने के बाद की जा सकती है। ललन सिंह इस समय इजराइल के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, जहां वे ‘ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर’ समिट में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान भारत और इजराइल के बीच मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में सहयोग से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके पटना लौटते ही इस मुद्दे पर अंतिम मुहर लग सकती है।
नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह का पुराना रिश्ता
आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच संबंधों का इतिहास करीब 25 साल पुराना बताया जाता है। आरसीपी सिंह ने खुद यह बात सार्वजनिक मंच से कही है कि दोनों के बीच कभी कोई दूरी नहीं रही। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दोनों अलग राह पर नजर आए, लेकिन हालिया घटनाक्रम से यह संकेत मिल रहा है कि पुराना तालमेल फिर से मजबूत हो रहा है। यही वजह है कि आरसीपी सिंह की वापसी को केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जदयू की राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
जन सुराज से जुड़ाव और बदला रुख
जदयू से अलग होने के बाद आरसीपी सिंह ने प्रशांत किशोर की पहल जन सुराज के साथ अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई थी। उनकी बेटी लता सिंह ने वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नालंदा जिले की अस्थावां सीट से जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिल सकी और उन्हें लगभग 15,962 वोटों से संतोष करना पड़ा। बेटी के चुनावी अनुभव के बाद आरसीपी सिंह का दोबारा जदयू की ओर झुकाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जदयू संगठन की तैयारी
पार्टी सूत्रों का दावा है कि जदयू संगठन स्तर पर आरसीपी सिंह के स्वागत की पूरी तैयारी कर ली गई है। यही कारण है कि कार्यालय के बाहर स्वागत वाले पोस्टर लगाए गए हैं। संगठन के भीतर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पार्टी एकजुट है और पुराने नेताओं की वापसी का रास्ता खुला है। यह कदम आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भी अहम माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति पर संभावित असर
यदि आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी होती है, तो इसका असर बिहार की राजनीति पर दूरगामी हो सकता है। एक ओर इससे जदयू को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों की रणनीतियों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। आरसीपी सिंह को प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव वाला नेता माना जाता है, ऐसे में उनकी वापसी से पार्टी को नए सिरे से ऊर्जा मिल सकती है। पटना में जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने आरसीपी सिंह की वापसी की चर्चाओं को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। औपचारिक घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ हैं कि बिहार की राजनीति में जल्द ही एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

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