पटना की बारिश ने फल व्यापारियों की बढ़ाई परेशानी, बाजार समिति में घुसा, पानी करोड़ों के फल हुए बर्बाद

पटना। पटना में बीते दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने आमजन के साथ-साथ व्यापारियों की भी परेशानियां बढ़ा दी हैं। विशेषकर बाजार समिति स्थित फल मंडी के व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मंडी में पानी भर गया, जिससे करोड़ों रुपये के फल बर्बाद हो गए।
फल व्यापार पूरी तरह प्रभावित
बारिश का पानी सीधे मंडी परिसर में घुस आया, जिससे आम, पपीता, केला जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों को भारी क्षति पहुंची। पटना फूड्स मार्केट एसोसिएशन के महासचिव के अनुसार, वर्तमान में आम का सीजन अपने चरम पर है। उत्तर प्रदेश से लंगड़ा और चौसा किस्म के आम बड़ी मात्रा में मंगाए जाते हैं। रात के समय जब नो एंट्री खत्म होती है, तभी ट्रकों से आमों को मंडी में उतारा जाता है। इन आमों को पकाने के लिए कार्बाइड देकर जमीन पर प्लास्टिक के पाल में रखा जाता है। रात में हुई मूसलधार बारिश के कारण पाल में रखे अधिकतर आम सड़ गए, जिससे व्यापारियों को लाखों रुपए का सीधा नुकसान हुआ।
भारी बारिश से सड़ गए फल
मंडी परिसर में अन्य फलों जैसे पपीता, केला, सेब, संतरा आदि के कार्टून भी जमीन पर रखे जाते हैं। लगातार बारिश के कारण ये भीगकर गल गए और पूरी तरह नष्ट हो गए। व्यापारी भुट्टो खान का कहना है कि बाजार समिति मंडी का लेवल सड़क से लगभग डेढ़ फीट नीचे है, जिससे बारिश का पानी जमा हो जाता है और निकलने का रास्ता नहीं होता। उन्होंने बताया कि वर्षों से नाला निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान
वरुण कुमार, जो मंडी के मीडिया प्रभारी हैं, उनके अनुसार मंडी में लगभग 400 दुकानें हैं, जहां प्रतिदिन विभिन्न राज्यों से ट्रकों द्वारा फल पहुंचते हैं। पपीता की 30 और केला की 36 दुकानें हैं। एक व्यापारी का प्रतिदिन का कारोबार तीन से चार लाख तक का होता है। बारिश के चलते पपीता की दुकानों को हुए नुकसान का अनुमान लगाया जाए तो यह लगभग तीन करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इसी तरह से आम, सेब, अनार, संतरा आदि फलों के व्यापारियों का भी करोड़ों का नुकसान हुआ है।
अन्य व्यापार भी प्रभावित
फल व्यापारियों के साथ-साथ सब्जी और मछली के व्यापारियों को भी बारिश से भारी क्षति हुई है। आलू, प्याज, मछली जैसे खाद्य उत्पाद बारिश के पानी में भीगकर खराब हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस प्रकार की समस्या हर वर्ष आती है लेकिन सरकार और स्थानीय प्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देकर चुप हो जाते हैं।
व्यवस्थागत लापरवाही के आरोप
व्यापारी संघ ने आरोप लगाया है कि पटना में कई स्थानों पर नगर निगम, वुडको और नमामि गंगे जैसी योजनाओं के तहत सड़कें खोदी गई हैं। इसके कारण पानी की निकासी और अधिक बाधित हो रही है। मंडी संघ के अनुसार, इतने बड़े व्यापारिक केंद्र की समस्याओं को यहां के सांसद और विधायक कभी गंभीरता से नहीं लेते।
व्यापारियों की मांगें
व्यापारी संघ ने सरकार से मांग की है कि मंडी में तत्काल जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और स्थायी समाधान के रूप में नाला निर्माण कराया जाए। मंडी परिसर की सतह को सड़क के स्तर तक ऊंचा किया जाए ताकि जलजमाव की स्थिति उत्पन्न न हो। जब तक प्रशासन उचित व्यवस्था नहीं करता, तब तक फल व्यापारियों को ऐसे नुकसान का सामना करना ही पड़ेगा।

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