राबड़ी ने सम्राट चौधरी को बताया गुंडा, कहा- वह क्या बोलेगा, वे लड़कियां छेड़ता था, सब जानते है

पटना। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के आखिरी दिन का माहौल भी बाकी दिनों की तरह बेहद हंगामेदार रहा। जैसे ही विधान सभा और विधान परिषद की कार्यवाही शुरू हुई, कुछ ही मिनटों में उसे हंगामे के कारण स्थगित करना पड़ा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।
राबड़ी देवी का सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत हमला
सदन के भीतर कार्यवाही भले ही स्थगित हो गई हो, लेकिन बाहर बयानबाज़ी और आरोपों की राजनीति चरम पर रही। विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर और व्यक्तिगत आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी बचपन से ही ‘गुंडा प्रवृत्ति’ के रहे हैं। राबड़ी देवी ने खुलकर कहा कि वह सम्राट को बचपन से देखती आ रही हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि बोरिंग रोड इलाके में वे लड़कियों को छेड़ते थे। उनका कहना था कि जो खुद गुंडागर्दी करता है, वह दूसरों को कैसे गुंडा कह सकता है। यह बयान बेहद विवादास्पद रहा और इससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
राज्य सरकार पर घोटाले के आरोप
राबड़ी देवी ने सिर्फ सम्राट चौधरी पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि बिहार की नीतीश सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार घोटालों में लिप्त है और केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने Comptroller and Auditor General (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने 70,877 करोड़ रुपये की योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक प्रस्तुत नहीं किए हैं। राबड़ी देवी के अनुसार, राज्य सरकार लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त रही है और 2014 से अब तक घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार सही तरीके से काम कर रही होती, तो इतने बड़े पैमाने पर राशि के हिसाब-किताब में पारदर्शिता क्यों नहीं है।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतज़ार
राबड़ी देवी के इन गंभीर आरोपों पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष भी इन आरोपों का जवाब देने के लिए आक्रामक रुख अपना सकता है।
राजनीतिक गरमाहट और तीखे संवाद
यह घटना बिहार की राजनीति में भाषा और आरोपों की गिरती मर्यादा का एक और उदाहरण है। जहां एक ओर नेता सदन में बहस और संवाद के जरिए मुद्दे उठाने की जगह छोड़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत हमलों और अतीत के आरोपों को मंच बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का अंत भी उसी अंदाज़ में हुआ, जैसा इसकी शुरुआत हुई थी—हंगामेदार, आरोपों से भरा और विपक्ष-सत्ता के बीच तीखे टकराव से युक्त। राबड़ी देवी द्वारा सम्राट चौधरी पर लगाया गया आरोप राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक रूप से भी गंभीर है। इन बयानों से यह तो स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और भी अधिक गरमाएगी। साथ ही, भ्रष्टाचार जैसे वास्तविक मुद्दे अब भी जनता के बीच जवाब की माँग कर रहे हैं।

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