ईरान युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, भारत में आपूर्ति सुरक्षित, लॉकडाउन की अफवाहों पर विराम

  • कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार, विश्वभर में ईंधन संकट और महंगाई का असर
  • केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आश्वासन, उत्पाद शुल्क में कटौती कर सरकार ने दी राहत

नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका गहराती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। इसके कारण दुनिया के कई देशों में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में महंगाई और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति देखी जा रही है।
भारत में स्थिति नियंत्रण में
वैश्विक संकट के बीच भारत में भी ईंधन आपूर्ति को लेकर विभिन्न तरह की आशंकाएं सामने आने लगी थीं। कुछ स्थानों पर यह चर्चा फैलने लगी थी कि पेट्रोल और डीजल की कमी हो सकती है तथा लॉकडाउन जैसी स्थिति बन सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन सभी आशंकाओं को पूरी तरह निराधार बताया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और नागरिकों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सरकार की सतर्क निगरानी
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का नियमित आकलन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर कोई प्रभाव न पड़े। मंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जिम्मेदारी के साथ स्थिति को समझें।
उत्पाद शुल्क में कटौती से राहत
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि होने के बावजूद आम नागरिकों पर इसका सीधा प्रभाव कम करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 26 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े।
तेल कंपनियों को सहयोग
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को भी सहयोग देने का निर्णय लिया है ताकि वे बढ़ती लागत के दबाव को संतुलित कर सकें। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियां कच्चे तेल की कीमत, परिवहन व्यय और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए ईंधन की खुदरा कीमत तय करती हैं। उत्पाद शुल्क में कमी से इन कंपनियों को घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है और कीमतों में अचानक वृद्धि से बचा जा सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की संवेदनशीलता
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य का क्षेत्र काफी संवेदनशील बना हुआ है। विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है क्योंकि भारत ने पहले ही अपने आयात स्रोतों में विविधता ला दी है।
वैकल्पिक स्रोतों से आयात
भारत सरकार ने पिछले कुछ समय में रणनीतिक दृष्टि से अपने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को विविध बनाया है। रूस, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाया गया है। इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में बाधा आने की संभावना भी कम हुई है। यह कदम वर्तमान संकट के समय भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
पर्याप्त भंडार उपलब्ध
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के पास लगभग 60 दिनों का पेट्रोल और डीजल का भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग एक महीने की रसोई गैस की आपूर्ति भी सुरक्षित है। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और विमान ईंधन सहित विभिन्न प्रकार के ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में स्थिति नियंत्रण में है।
अफवाहों से बचने की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर घबराहट की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तनाव की स्थिति बनी रहने पर भी भारत में आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखा जा सकता है। ईरान युद्ध से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है, लेकिन भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है। सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों और वैकल्पिक स्रोतों से आयात की रणनीति के कारण देश में ईंधन की उपलब्धता सुरक्षित बनी हुई है।

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