पंजाब के आप विधायक पठानमाजरा करनाल से गिरफ्तार, बलात्कार के लगे गंभीर आरोप, हिरासत से फरार

करनाल। पंजाब की सियासत में उस समय हलचल मच गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा की गिरफ्तारी और हिरासत से फरार होने की खबर सामने आई। पठानमाजरा, जो पंजाबी विधानसभा के सन्नौर से विधायक हैं, को पंजाब पुलिस ने हरियाणा के करनाल जिले से गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, खासकर ऐसे समय पर जब विधायक ने खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के आप नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बयानबाज़ी की थी। पुलिस के अनुसार, हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए सघन अभियान चलाया गया। बताया गया कि गिरफ्तार होने के बाद जब उन्हें थाने लाया जा रहा था, इसी दौरान वे पुलिस हिरासत से फरार हो गए। घटना के अनुसार, विधायक पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की और वाहन चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। इस मामले ने आम लोगों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हलचल पैदा कर दी है। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपनी गिरफ्तारी और लगे आरोपों को लेकर सोशल मीडिया का सहारा लिया। अपने फेसबुक लाइव में उन्होंने बताया कि उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और यह सब उनके मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने का परिणाम है। उन्होने आरोप लगाया कि विपक्षी आवाज को दबाने के लिए यह सब किया जा रहा है। वहीं, सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि पुलिस मामले की न्यायसंगत और निष्पक्ष जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों का दमन करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का गलत इस्तेमाल कर रही है। वहीं, सरकार ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए जांच की पारदर्शिता का भरोसा दिलाया है और कहा है कि कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। आगामी दिनों में इस मामले के कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर और भी गतिवधियां देखने को मिल सकती हैं। अदालत और पुलिस की आगामी कार्रवाई, पार्टी का आंतरिक रुख, और विपक्ष का धरना-प्रदर्शन—इन सभी पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। आम आदमी पार्टी के लिए यह मामला परीक्षा की घड़ी है, वहीं राज्य की कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में है। पूरे प्रकरण ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है जहाँ कानून, राजनीति और प्रशासन की जंग सामने आ चुकी है।

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