January 27, 2026

पीएमसीएच से कैदी फरार, बाथरूम का खिड़की तोड़कर भागा, सीसीटीवी से जांच में जुटी पुलिस

पटना। राजधानी पटना में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) से इलाज के दौरान एक कैदी के फरार होने की घटना ने न केवल पुलिस प्रशासन को सतर्क कर दिया है, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना गुरुवार की है, जब स्नैचिंग के आरोप में गिरफ्तार आरोपी इलाज के नाम पर अस्पताल में भर्ती था और वहीं से मौका देखकर भाग निकला।
कैदी की पहचान और गिरफ्तारी का मामला
फरार कैदी की पहचान दीपक उर्फ गौरव कुमार के रूप में हुई है। वह पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के अलकापुरी, रोड नंबर 21 का रहने वाला बताया जा रहा है। दीपक मोबाइल और चेन स्नैचिंग के कई मामलों में पहले भी शामिल रहा है। हाल ही में खगौल थाना क्षेत्र में हुई स्नैचिंग की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया था। लोगों ने उसकी पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले किया था। घायल होने के कारण पुलिस उसे इलाज के लिए पीएमसीएच लेकर आई थी।
उपचार के दौरान हुई सुरक्षा चूक
पीएमसीएच में इलाज के दौरान दीपक की देखरेख के लिए दो होमगार्ड जवान — अजीत कुमार और साधु शरण दास — को तैनात किया गया था। अस्पताल में उसे सामान्य वार्ड में रखा गया था, जहाँ मरीजों और तीमारदारों की लगातार आवाजाही होती रहती है। इसी बीच दीपक बाथरूम गया और वहां स्थित एक खिड़की के शीशे को तोड़कर बाहर निकल गया। बताया जाता है कि बाथरूम से निकलने के बाद उसने अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से से बाहर जाने का रास्ता बनाया और बिना किसी की नजर में आए फरार हो गया।
घटना के बाद पुलिस हरकत में
घटना की जानकारी मिलते ही दोनों होमगार्ड सिपाहियों ने इसकी सूचना खगौल थाना प्रभारी और पीरबहोर थाना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत पीएमसीएच परिसर की घेराबंदी की और विभिन्न जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फिलहाल पीरबहोर थाना में इस मामले की एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
सुरक्षा पर लगे बड़े सवाल
यह पहली बार नहीं है जब पीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी अस्पताल से इस तरह किसी आरोपी या कैदी के फरार होने की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां इलाज के बहाने आरोपी अस्पताल में भर्ती हुए और पुलिस की लापरवाही के कारण फरार हो गए। यह सवाल अब गंभीर रूप से उठने लगा है कि आखिर किस तरह की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था अस्पताल में की जाती है।
होमगार्ड सिपाहियों की भूमिका पर संदेह
फरार होने की घटना के बाद तैनात दोनों होमगार्ड सिपाहियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वे सतर्क थे? क्या निगरानी में कोई चूक हुई? या फिर आरोपी की फरारी में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत की संभावना है? इन सवालों के चलते पुलिस विभाग ने दोनों जवानों से पूछताछ शुरू कर दी है। उन्हें विभागीय जांच का सामना करना पड़ सकता है।
अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था
पीएमसीएच बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग इलाज के लिए आते हैं। लेकिन अस्पताल परिसर में सुरक्षा की स्थिति अक्सर लचर देखी गई है। न तो पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं, न ही प्रवेश और निकासी द्वारों पर कड़ी जांच की व्यवस्था होती है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में कई आरोपी और बंदी अस्पताल से फरार हो चुके हैं।
पुलिस की चुनौती
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती दीपक को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की है। क्योंकि अपराधी के फरार रहने से वह दोबारा अपराध करने की स्थिति में आ सकता है। इसके अलावा पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। पीएमसीएच से कैदी का इस तरह फरार होना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि अस्पताल की सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों को भी उजागर करता है। यह आवश्यक है कि अस्पतालों में कैदियों या आरोपियों की निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाया जाए और तैनात जवानों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाए। तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा और आम लोगों का विश्वास प्रणाली पर बना रहेगा।

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