दरभंगा के डीएमसीएच से फाफर हुआ कैदी, टॉयलेट की खिड़की तोड़कर फरार, सीसीटीवी से जांच जारी
दरभंगा। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमसीएच) से इलाज के लिए लाया गया एक कैदी रविवार की देर रात पुलिस की निगरानी में रहते हुए फरार हो गया। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि अस्पताल प्रशासन की सतर्कता पर भी संदेह पैदा किया है।
बीमार होने पर कैदी को अस्पताल लाया गया था
फरार कैदी की पहचान सूरज कुमार झा के रूप में हुई है, जो चोरी के एक मामले में बेनीपुर उपकारा में बंद था। उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद 19 अप्रैल को इलाज के लिए डीएमसीएच लाया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे मेडिसिन विभाग के आईसीयू में भर्ती किया गया। कैदी की निगरानी के लिए तीन सिपाही नियुक्त किए गए थे।
टॉयलेट के बहाने भाग निकला कैदी
रविवार देर रात सूरज कुमार ने ड्यूटी पर तैनात सिपाही प्रह्लाद कुमार से टॉयलेट जाने की इजाजत मांगी। प्रह्लाद ने उसे हथकड़ी पहनाकर शौचालय तक ले जाया, लेकिन सूरज ने मौके का फायदा उठाकर टॉयलेट के पीछे की खिड़की तोड़ दी और भाग निकला। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आया तो सिपाही ने अंदर जाकर देखा, लेकिन तब तक वह फरार हो चुका था।
सीसीटीवी से जांच, पुलिस की छापेमारी जारी
घटना की सूचना मिलते ही उच्च अधिकारी हरकत में आ गए। डीएमसीएच परिसर और आसपास के इलाके में सर्च अभियान शुरू कर दिया गया है। डायल 112 की टीम और बेंता थाना की पुलिस भी उसकी तलाश में जुट गई है। अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उसके भागने की दिशा और संभावित ठिकाने का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना से एक बार फिर पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। सवाल यह उठता है कि जब एक मानसिक रूप से कमजोर कैदी को अस्पताल लाया गया था तो उसकी निगरानी में और सतर्कता क्यों नहीं बरती गई। तीन सिपाहियों की तैनाती के बावजूद वह कैसे फरार हो गया, यह जांच का विषय है। सिपाही प्रह्लाद कुमार का कहना है कि सूरज मानसिक रूप से अस्वस्थ था, पर यह भी स्पष्ट नहीं है कि उसकी मानसिक स्थिति की सही रिपोर्ट क्या थी।
कड़ी कार्रवाई की तैयारी
फरार कैदी की गिरफ्तारी के लिए सभी संभावित जगहों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। जल्द ही सूरज कुमार की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। साथ ही इस चूक के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। यह घटना बताती है कि कैदियों के इलाज के नाम पर दी जाने वाली छूट का अपराधी किस तरह से फायदा उठाते हैं और यह भी कि पुलिस को अब अपनी निगरानी व्यवस्था को और कड़ा करने की जरूरत है।


