सुपौल में एएनएम ट्रेनिंग स्कूल में प्रिंसिपल ने महिला शिक्षिका का बनाया वीडियो, फोन में मिली 150 तस्वीर, डीएम ने दिए जांच के आदेश
सुपौल। बिहार के सुपौल जिले से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली बल्कि महिला कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के निर्मली प्रखंड स्थित एएनएम प्रशिक्षण स्कूल सह छात्रावास में तैनात प्रभारी प्रिंसिपल पर महिला शिक्षिकाओं के निजी वीडियो और तस्वीरें बनाने का आरोप लगा है। मामला उजागर होते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया है और जिलाधिकारी ने इसकी निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।
प्रयोगशाला से शुरू हुआ विवाद
महिला शिक्षिकाओं के अनुसार, यह घटना उस समय सामने आई जब वे प्रशिक्षण स्कूल की प्रयोगशाला में अपने नियमित कार्य के लिए गई थीं। आरोप है कि इसी दौरान प्रभारी प्रिंसिपल मौलाना साजिद इकबाल कैफी ने बिना अनुमति उनके वीडियो बनाने शुरू कर दिए। जब शिक्षिकाओं को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल इसका विरोध किया और वीडियो हटाने की मांग की। आरोप है कि प्रिंसिपल ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
मोबाइल जांच में मिले सैकड़ों फोटो
विरोध के बाद शिक्षिकाओं ने अन्य कर्मचारियों को भी मौके पर बुलाया और प्रिंसिपल के मोबाइल फोन की जांच की मांग की। शिक्षिकाओं का दावा है कि मोबाइल की जांच के दौरान उसमें अलग-अलग महिला शिक्षिकाओं की करीब 100 से 150 तस्वीरें और वीडियो मिले। ये तस्वीरें विभिन्न कोणों से ली गई थीं, जिससे संस्थान परिसर में अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया। काफी देर तक विवाद चला और दबाव बढ़ने पर मोबाइल से तस्वीरें हटाई गईं।
प्रिंसिपल का पक्ष
आरोपित प्रभारी प्रिंसिपल ने अपने मोबाइल में तस्वीरें होने की बात स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने यह सफाई दी कि ये तस्वीरें उन्होंने सामाजिक माध्यमों से डाउनलोड की थीं। हालांकि महिला शिक्षिकाओं का कहना है कि ये तस्वीरें उसी संस्थान परिसर में ली गई थीं और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं हो सकता। इस विरोधाभास ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। सावन कुमार के निर्देश पर एक जांच टीम का गठन किया गया। इस टीम में उप मंडल पदाधिकारी, उप पुलिस अधीक्षक, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और पुलिस बल को शामिल किया गया। टीम ने प्रशिक्षण संस्थान पहुंचकर परिसर का निरीक्षण किया और महिला शिक्षिकाओं सहित अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच के दौरान महिला शिक्षिकाओं ने केवल वीडियो और फोटो बनाने का आरोप ही नहीं लगाया, बल्कि संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। उनका कहना है कि छात्रावास परिसर में न तो पुख्ता चारदीवारी है और न ही सुरक्षित मुख्य द्वार की व्यवस्था। इसके अलावा स्थायी वार्डन और पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की भी कमी है। इन खामियों के कारण छात्राओं और महिला कर्मचारियों में हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
महिला शिक्षिकाओं ने संस्थान में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि पुस्तकालय और संस्थान के विकास के नाम पर जो राशि खर्च दिखाई गई है, उसका वास्तविक लाभ संस्थान को नहीं मिला। आरोप है कि वर्ष 2021 से अक्टूबर 2025 तक संस्थान में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ। इसके अलावा यह भी कहा गया कि सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बैठकों की सूचना शिक्षिकाओं को समय पर नहीं दी जाती और प्रिंसिपल स्वयं ही इन कार्यक्रमों में भाग ले लेते हैं।
छात्रावास के कमरों का निजी उपयोग
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रभारी प्रिंसिपल छात्रावास के दो कमरों का निजी उपयोग कर रहे थे। महिला शिक्षिकाओं की आपत्ति के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इन कमरों से बिस्तर और अन्य सामान बाहर निकलवाया गया। इस कार्रवाई के बाद संस्थान में कुछ हद तक तनाव का माहौल शांत हुआ, लेकिन सवाल अभी भी बने हुए हैं।
जिलाधिकारी का आश्वासन
जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और महिला कर्मचारियों व छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा पर बहस
यह घटना सामने आने के बाद शिक्षा संस्थानों में महिला कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि प्रशिक्षण संस्थानों और छात्रावासों में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कितनी मजबूत है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने न सिर्फ सुपौल, बल्कि पूरे राज्य में शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


