बेतिया में बोले सीएम नीतीश, कहा- पुरानी सरकारों ने कुछ नहीं किया, पहले केवल होता था हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा
बेतिया। बिहार की राजनीति और विकास कार्यक्रमों के लिहाज से शुक्रवार का दिन काफी अहम रहा, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम चंपारण के बेतिया से अपनी बहुप्रचारित ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत की। बड़े रमना मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 2005 से पहले के बिहार की स्थिति और वर्तमान सरकार के कार्यों की तुलना करते हुए पुराने शासनकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “2005 से पहले बिहार में क्या था, लोग शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकलते थे। समाज में विवाद होता था। हिंदू-मुस्लिम झगड़े होते थे। पढ़ाई बहुत कम होती थी। इलाज की व्यवस्था नहीं थी। सड़कें कम थीं और बिजली बहुत कम जगह थी।”मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 के बाद जब उनकी सरकार आई तो राज्य में सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं की गईं। उन्होंने कहा, “हम लोगों की सरकार आई तो सभी व्यवस्थाएं कीं। पुराने वालों ने कोई काम नहीं किया। हमने शुरू से बिहार के विकास के लिए काम किया है। अब कोई हिंदू-मुस्लिम झगड़े करता है क्या?”सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने समाज में शांति बनाए रखने के लिए 2006 में कब्रिस्तानों की घेराबंदी और 2016 में 60 वर्ष से पुराने हिंदू मंदिरों की भी घेराबंदी कराई, ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना भेदभाव सभी धर्मों और समुदायों के लिए कार्य किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेतिया में विकास योजनाओं की बड़ी सौगात भी दी। जानकारी के अनुसार, उन्होंने जिले में कुल 182 करोड़ रुपये की 161 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन योजनाओं से सड़क, पुल-पुलिया, भवन निर्माण, ग्रामीण विकास, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। ‘समृद्धि यात्रा’ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई थीं। मुख्यमंत्री ने मंच पर स्वागत के लिए पहुंचे नेताओं को स्वयं शॉल पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने जीविका दीदियों से बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना और उनके कार्यों की सराहना की। ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री कुमारबाग पहुंचे, जहां उन्होंने स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) का निरीक्षण किया। यहां उद्योग विभाग की ओर से लगभग तीन दर्जन स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें स्टार्टअप जोन सहित कई इंडस्ट्रियल स्टॉलों के माध्यम से जिले की औद्योगिक संभावनाओं और निवेश अवसरों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इस दौरान एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया जब उपमुख्यमंत्री की गाड़ी को प्रवेश द्वार पर एंट्री नहीं दी गई। बताया गया कि सुरक्षा और प्रोटोकॉल व्यवस्था के कारण यह स्थिति बनी, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को गेट से पैदल कार्यक्रम स्थल तक जाते हुए देखा गया। मुख्यमंत्री की यह ‘समृद्धि यात्रा’ सिर्फ राजनीतिक दौरा नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, नए प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन और जनसंवाद के जरिए जनता की समस्याओं को सुनने का अभियान भी बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में मुख्यमंत्री 9 जिलों को कवर करेंगे और 24 जनवरी को वैशाली में अपनी यात्रा का पहला चरण समाप्त करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ‘समृद्धि यात्रा’ से मुख्यमंत्री एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार विकास कार्यों के साथ जनता के बीच संवाद को मजबूत करेगी। वहीं दूसरी ओर विपक्ष को जवाब देते हुए वे 2005 से पहले के हालात की याद दिलाकर सुशासन और विकास का नैरेटिव आगे बढ़ा रहे हैं। समृद्धि यात्रा के पहले दिन ही बेतिया में भीड़ और कार्यक्रम की भव्यता से यह संकेत जरूर मिला कि आगामी दिनों में यह यात्रा बिहार की राजनीति और विकास बहस दोनों को नई दिशा दे सकती है।


