January 7, 2026

जमुई के सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, डॉक्टर और नर्स फरार

जमुई। सदर अस्पताल में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और तनाव का माहौल बन गया। ऑपरेशन के बाद महिला की जान जाने से परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का संक्षिप्त विवरण
यह घटना गुरुवार शाम जमुई सदर अस्पताल की है। मृतका की पहचान जमुई नगर परिषद क्षेत्र के नीमारंग मोहल्ला निवासी और पूर्व वार्ड पार्षद केदार साव की 22 वर्षीय बहू पूजा कुमारी के रूप में हुई है। पूजा कुमारी को प्रसव के लिए दो दिन पहले सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव होगा, लेकिन यह उम्मीद एक दर्दनाक हादसे में बदल गई।
अस्पताल में भर्ती और ऑपरेशन की प्रक्रिया
परिजनों के अनुसार, पूजा कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन से डिलीवरी कराने की सलाह दी। गुरुवार दोपहर करीब एक बजे महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। ऑपरेशन के दौरान परिजन बाहर इंतजार कर रहे थे और उन्हें बताया गया कि स्थिति नियंत्रण में है।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ती हालत
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और शरीर में कोई हरकत नहीं दिखाई दे रही थी। इसके बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया। परिवार का कहना है कि डॉक्टरों और नर्सों को कई बार स्थिति की गंभीरता बताई गई, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
रेफर करने को लेकर उठा विवाद
शाम करीब चार बजे अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद आलम और एक अन्य चिकित्सक ने महिला की हालत नाजुक बताते हुए उसे पीएमसीएच पटना रेफर करने का निर्णय लिया। परिजन रेफर की प्रक्रिया पूरी कर महिला को एक निजी क्लिनिक ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि पूजा कुमारी की मौत लगभग दो घंटे पहले ही हो चुकी थी। इस बात का पता चलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
मौत की खबर के बाद हंगामा
महिला की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण सदर अस्पताल पहुंच गए। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
डॉक्टर और नर्सों के फरार होने का आरोप
हंगामा बढ़ता देख ऑपरेशन थिएटर और प्रसूति वार्ड से कई डॉक्टर और नर्सें मौके से फरार हो गईं। इससे लोगों का आक्रोश और भी बढ़ गया। परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन पारदर्शिता से स्थिति स्पष्ट करता और समय पर इलाज करता तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद आलम ने अपने बयान में कहा कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत अचानक नाजुक हो गई थी, इसलिए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। उनके अनुसार, रेफर किए जाने के समय महिला जीवित थी और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। वहीं, ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर नम्रता कुमारी ने कहा कि ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। उनके अनुसार, इसके बाद महिला की मौत कैसे हुई, इसका स्पष्ट कारण उन्हें भी नहीं पता है।
जांच की प्रक्रिया शुरू
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों की मांग और सवाल
मृतका के परिजन और ग्रामीण लगातार यह मांग कर रहे हैं कि दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज और निगरानी होती तो पूजा कुमारी की जान बच सकती थी। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है और लोग सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।

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