January 16, 2026

जहानाबाद में गर्ल्स हॉस्टल रेप पीड़िता के परिजनों से प्रशांत किशोर ने की मुलाकात, कहा- नए सिरे से हो जांच, जल्द हो गिरफ्तारी

पटना/जहानाबाद। पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रही जहानाबाद की मेधावी छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था और जांच प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार के आरोपों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासों और पुलिस की शुरुआती भूमिका को लेकर उठे संदेह के बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष और नए सिरे से जांच की मांग की है। गुरुवार को प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे और पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि इस लड़ाई में जन सुराज पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा रहेगा। परिजनों से बातचीत के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने पुलिस की प्रारंभिक जांच पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या बताने की कोशिश की गई, जबकि रिपोर्ट में यौन शोषण की आशंका से साफ इनकार नहीं किया गया है। दरअसल, छात्रा का शव हॉस्टल के कमरे में मिलने के बाद हॉस्टल प्रबंधन ने इसे नींद की गोलियों के ओवरडोज से हुई आत्महत्या करार दिया। शुरुआती दौर में पुलिस ने भी इसी थ्योरी को आगे बढ़ाया और कहा गया कि छात्रा डिप्रेशन में थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस कहानी में कई बड़े छेद नजर आए। रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के निशान, खरोंच, चोटें और सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी) की बात सामने आई है, जिसने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। यौन हमले की आशंका को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और यह कोई आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित कत्ल है। छात्रा के पिता ने दावा किया कि हॉस्टल प्रबंधन ने घटना के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। उनके अनुसार, सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए गए, कमरे में दवाइयां रखकर आत्महत्या का नाटक रचा गया और छात्रा के सामान से छेड़छाड़ की गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस के मौजूदा जांच अधिकारी उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने हॉस्टल वार्डन मनीष रंजन को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका के चलते यह कार्रवाई की गई। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों के बीच उसे सेकेंड ओपिनियन के लिए एम्स पटना भेजा गया है, ताकि जांच पर किसी तरह के दबाव या पक्षपात का आरोप न लगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि शुरुआती जांच में कोई चूक हुई है तो उसे दबाने के बजाय सुधारना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला एक बच्ची की जान और उसकी इज्जत से जुड़ा है, ऐसे में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला तो जन सुराज संविधान के दायरे में रहकर हर लोकतांत्रिक कदम उठाएगा। शुक्रवार को वह पीड़ित परिवार के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच की मांग करेंगे। इस घटना के बाद इलाके में गुस्से का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि इंसाफ के रास्ते में कोई बाधा डाली गई तो यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। फिलहाल, शंभू गर्ल्स हॉस्टल ‘खौफ के अड्डे’ के रूप में चर्चित हो चुका है और बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच सच तक पहुंचती है या यह मामला भी फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा।

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