भागलपुर में तेजस्वी पर बरसे प्रशांत किशोर, कहा- उनको समाजवाद की समझ नहीं, जनता अब झांसे में नहीं आएगी
भागलपुर। बिहार की राजनीति में सक्रियता बढ़ा रहे जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भागलपुर में आयोजित ‘जन संवाद’ कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। अपने संबोधन में उन्होंने तेजस्वी पर समाजवाद की समझ न होने का आरोप लगाया और कहा कि लालू यादव का राजनीतिक युग अब समाप्त हो चुका है।
तेजस्वी को दी समाजवाद पर ट्यूशन लेने की सलाह
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में साफ कहा कि तेजस्वी यादव समाजवाद की मूल भावना को नहीं समझते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि तेजस्वी को पहले इस विषय की पढ़ाई करनी चाहिए, समाजवाद की परिभाषा जाननी चाहिए और किसी जानकार से ट्यूशन लेकर बिना कागज के मंच से दस मिनट इस विषय पर बोलना चाहिए। अगर वह ऐसा कर पाते हैं तो ही माना जा सकता है कि उन्हें समाजवाद की सही जानकारी है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल नाम लेकर राजनीति नहीं की जा सकती, अब जनता दिखावे की राजनीति के झांसे में आने वाली नहीं है।
बिहार की सबसे बड़ी समस्या: शिक्षा और भ्रष्टाचार
प्रशांत किशोर ने बिहार के विकास में सबसे बड़ी बाधा शिक्षा की कमी और व्यापक भ्रष्टाचार को बताया। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा का प्रसार नहीं होगा, तब तक राज्य का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने बिहार की स्थिति को डूबते हुए जहाज से तुलना करते हुए कहा कि अगर जहाज डूब रहा हो तो केवल एक कमरे को नहीं बचाया जा सकता। पूरे सिस्टम को सुधारना जरूरी है।
जन सुराज: एक वैकल्पिक राजनीतिक सोच
प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज सिर्फ एक राजनीतिक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह बिहार की जनता के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक सोच प्रस्तुत कर रहा है। यह एक ईमानदार प्रयास है ताकि राज्य को नई दिशा दी जा सके। उन्होंने कहा कि बदलाव तब तक संभव नहीं जब तक आम लोग राजनीति में भाग नहीं लेंगे और व्यवस्था की खामियों को नहीं समझेंगे।
जातीय जनगणना से नहीं, ठोस नीतियों से होगा विकास
जातिगत जनगणना को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि यह केवल आंकड़े प्रस्तुत करने का माध्यम है, समाधान नहीं। उन्होंने उदाहरण दिया कि बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े तो आ चुके हैं लेकिन आज भी एससी वर्ग की साक्षरता दर मात्र 3 प्रतिशत है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या केवल आंकड़े इकट्ठा कर लेना ही समाधान है, जबकि जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
बदलाव की ओर बढ़ते कदम
अपने भाषण के अंत में प्रशांत किशोर ने लोगों से अपील की कि वे राजनीति को केवल नेताओं के भरोसे न छोड़ें, बल्कि स्वयं आगे आकर बदलाव की दिशा में भागीदार बनें। जन सुराज का उद्देश्य यही है कि भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए और एक नई राजनीतिक संस्कृति को स्थापित किया जाए।


