जातीय जनगणना कराने को ले राजनीति तेज : मांझी बोले- बाघ, बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं?, गौस बोले- हिजड़ों की गिनती हो सकती है, लेकिन पिछड़ों की नहीं
पटना। बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज होती दिख रही है। विपक्ष के साथ-साथ जदयू और हम भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर पिछड़ों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाति आधारित जनगणना कराए जाने के बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री व हम के सुप्रीमो जीतनराम मांझी भी समर्थन में कूद पडेÞ हैं। मांझी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा कि जब देश में सांप, बाघ, बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं? उन्होंने भी कहा कि देश के विकास के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है। पता तो लगे कि किसकी कितनी आबादी है और उसे सत्ता में कितनी भागीदारी मिली।


हिजड़ों की गिनती तो हो सकती है, लेकिन पिछड़ों की नहीं: गौस
वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहले जदयू के विधान पार्षद प्रो गुलाम गौस ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह जातीय जनगणना की उपेक्षा न करे। इससे जनता में गलत संदेश जाएगा व पिछड़ी जातियों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। वर्तमान केन्द्र सरकार कांग्रेस की भूल को न अपनाएं। गौस ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश में हिजड़ों की गिनती तो हो सकती है, लेकिन पिछड़ों की नहीं?
बता दें केंद्र सरकार की तरफ से सदन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ किया था कि इस बार की जनगणना में एससी-एसटी वर्ग की जनगणना की जाएगी। अलग से जाति आधारित जनगणना का काम नहीं किया जाएगा, जिसके बाद से ही बिहार में इस मुद्दे को लेकर राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष के साथ-साथ जदयू ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर पिछड़ों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इस मसले पर बिहार भाजपा के नेता कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं।

