January 28, 2026

पटना में दीवारों से हटेंगे राजनीतिक पोस्टर, डीएम का आदेश, नगर निगम शुरू करेगी अभियान

पटना। शहर की सड़कों, दीवारों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर अब राजनीतिक दलों के पोस्टर और बैनर नहीं दिखेंगे। पटना के जिलाधिकारी त्याग राजन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी राजनीतिक पोस्टरों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। यह फैसला आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि शहर की सुंदरता बनी रहे और सार्वजनिक स्थलों का दुरुपयोग न हो।
शहर भर में फैले थे नेताओं के पोस्टर
अब तक पटना शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर के पोस्टरों की भरमार थी। जदयू, राजद, भाजपा और जन सुराज जैसे प्रमुख दलों ने अपने नेताओं की तस्वीरों और उपलब्धियों को दर्शाने वाले पोस्टरों और डिजिटल वॉल पेंटिंग से शहर को पाट दिया था। यह दृश्य आम जनता को हर चौराहे, दीवार और अंडरपास पर देखने को मिल रहा था।
नगर निगम का अभियान शुरू
जिलाधिकारी के आदेश के बाद पटना नगर निगम ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। सबसे पहले शहर के व्यस्त इलाकों जैसे बेली रोड, अनीसाबाद और गांधी मैदान में पोस्टर हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। नगर निगम कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी राजनीतिक पोस्टर या वॉल पेंटिंग सार्वजनिक दीवारों पर नहीं रहनी चाहिए।
पोस्टर हटाने में आ रही है कठिनाई
नगर निगम के कर्मी दिन-रात अभियान में जुटे हुए हैं, लेकिन उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई पोस्टर इतने मजबूत गोंद से चिपकाए गए हैं कि उन्हें हटाने में एक-एक पोस्टर पर आधे घंटे तक का समय लग रहा है। कर्मचारियों को एक दिन में लगभग 10 पोस्टर हटाने पर 500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। लेकिन अधिक समय लगने के कारण सभी पोस्टर हटाना चुनौती बन गया है।
विवाद और खर्च दोनों बढ़ा रहे पोस्टर
चुनाव प्रचार में पोस्टर लगाना राजनीतिक दलों के लिए एक महंगा सौदा साबित हो रहा है। एक पोस्टर लगाने में लगभग 250 से 300 रुपये तक का खर्च आता है। इसके अलावा, कई स्थानों पर जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अन्य दलों के पोस्टरों पर अपने पोस्टर चिपका दिए, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे राजनीतिक टकराव की आशंका भी बढ़ गई है।
आदर्श आचार संहिता लागू होते ही सख्ती
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा और आदर्श आचार संहिता लागू होगी, दीवारों पर पोस्टर लगाने जैसी गतिविधियों पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी सार्वजनिक या सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति के प्रचार सामग्री लगाना पूरी तरह निषिद्ध होता है।
पटना की दीवारें फिर होंगी साफ-सुथरी
नगर निगम की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। यदि अभियान इसी तरह जारी रहा, तो कुछ ही दिनों में पटना शहर की दीवारें एक बार फिर से साफ-सुथरी और पोस्टर मुक्त नजर आएंगी। इससे न केवल शहर की सुंदरता में वृद्धि होगी, बल्कि सार्वजनिक स्थलों का भी समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इस प्रकार यह कदम न सिर्फ राजनीतिक दलों को अनुशासन में लाने की दिशा में है, बल्कि शहरी सौंदर्य और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

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