बिना कोर्ट-प्राधिकार के आदेश के पुलिस ने रोका गृह निर्माण का कार्य! राजीव नगर थाना क्षेत्र का मामला, दोनों डिप्टी सीएम तथा वरीय अधिकारियों से पीड़िता ने लगाई गुहार
पटना।बिहार के नीतीश सरकार लगातार भूमि माफिया के खिलाफ अभियान छेड़ने का दावा करती है।दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा गृह तथा भूमि सुधार राजस्व विभाग के माध्यम से आमजनों को प्रशासनिक अत्याचार तथा माफियागिरी से मुक्ति दिलाने का आश्वासन देते रहते हैं। मगर धरातल पर स्थिति ठीक उसके उलट दिखती है।राजीव नगर थाना क्षेत्र के फ्रेंड्स कॉलोनी, जो आवास बोर्ड के अधिग्रहित क्षेत्र से बाहर की भूमि है,से एक ऐसी खबर सामने आई है जो आपकी सिस्टम पर से भरोसा हिलाने के लिए पर्याप्त होगी। इस बार फ्रेंड्स कॉलोनी की भूखंद स्वामिनी अलका देवी ने राजीव नगर थाना पर निजी भूखंड पर बिना किसी कोर्ट अथवा सक्षम प्राधिकार के आदेश के निर्माण कार्य बाधित करने का आरोप लगाया है। जो किसी प्रकार से विधि सम्मत प्रतीत नहीं होती है। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच करवा कर विधि सम्मत कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावे आवेदन की प्रति पुलिस महानिदेशक बिहार,आरक्षी महानिरीक्षक पटना,सीनियर एसपी पटना को भी प्रेषित की गई है। अलका देवी ने अपने आवेदन में कहा है कि उनके भूखंड पर निर्माण कार्य आरंभ हुआ था।जिसे स्थानीय राजीव नगर थाना के द्वारा बिना किसी न्यायालय अथवा प्राधिकार के आदेश के किसी बड़े पुलिस अधिकारी के कहने पर जबरन बंद करवा दिया गया।उन्होंने कहा कि मेरे भूखंड पर एक स्वत्व वाद कोर्ट में चल रहा था।जिसे गत 10 फरवरी को कोर्ट के द्वारा खारिज कर दिया गया।उन्होंने कहा कि मेरे जमीन पर निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

अलका देवी ने अपने द्वारा दिए गए आवेदन में उल्लेख किया है कि उन्होंने विगत वर्ष 2023 के 30 जून को मैंने सारण जिला के नवीन कुमार से पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत फ्रेंड्स कॉलोनी के रोड नंबर 3 स्थित एक भूखंड क्रय किया था।क्रय की पूरी प्रक्रिया विधि सम्मत थी।जिसका निबंधन पटना निबंधन कार्यालय में हुआ था।निबंधन के पूर्व मैंने उस जमीन के क्रय से संबंधित सारी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था।भू स्वामी नवीन कुमार के नाम से जमीन की रजिस्ट्री थी।उनके नाम से जमीन का भू लगान रसीद था। उनके नाम से जमीन की जमाबंदी थी।जमीन लंबे अरसे से उनके शांतिपूर्वक दखल कब्जे में थी। उक्त जमीन पर उनके चचेरे भाई के द्वारा बराबर अनर्गल तथा अप्रासंगिक विवाद कायम करने का कुप्रयास किया जाता रहा था।2022 में उन्होंने उस जमीन पर अनर्गल आरोप लगाए थे। जिसके संबंध में राजीव नगर थाना ने समुचित जांच किया तथा निबंधन कार्यालय ने पत्र संख्या 1523 दिनांक 21.07.22 के माध्यम से राजीव नगर थाना के सहायक अवर निरीक्षक हरिलाल प्रसाद यादव को विक्रय पत्र संख्या 7056,जो पूर्व के भू स्वामी रामप्रवेश पांडेय के द्वारा श्री नवीन कुमार को निबंधित किया गया था, को सत्यापित भी किया। अपने पत्र में जिला संयुक्त अवर निबंधक ने राजीव नगर थाना को संपत्ति के विवरण के साथ संपत्ति के खरीद-बिक्री के दस्तावेजों को सत्यापित किया। तमाम कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए मैंने भूखंड को खरीदा।उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आरंभ में जनवरी माह में मैंने अपने भूखंड पर मकान निर्माण का कार्य आरंभ किया।मगर गत 30 जनवरी को स्थानीय राजीव नगर थाना के पुलिसकर्मी मेरे मकान पर आए तथा निर्माण कार्य को रुकवा दिया। पूछने पर कोई कारण नहीं बताया। मैं वहां अनुपस्थित थी। मेरे कामगारों को वहां से भगा दिया। 31 जनवरी को जब मैं थाना पहुंची तथा इस बारे में पता करना चाहा। तो मुझे ठीक-ठीक किसी ने जवाब नहीं दिया।बस इतना कहा गया कि किसी उच्च अधिकारी के आदेश पर आपके गृह निर्माण के कार्य को रुकवा दिया गया है। मैं हैरान हो गई कि बगैर किसी सक्षम प्राधिकार या न्यायालय के लिखित आदेश के पुलिस कैसे किसी भूखंड स्वामी के भूखंड पर गृह निर्माण के प्रक्रिया को बाधित कर सकती है। यह किसी भी प्रकार से विधि/ न्याय सम्मत नहीं है।बाद में जानकारी मिली कि मेरे द्वारा क्रय किए गए उपरोक्त वर्णित संपत्ति के विक्रय अभिलेख के निबंधन होने के पूर्व 2022 में ही सुनील कुमार पांडेय ने उक्त जमीन पर पूर्व भूमि स्वामी नवीन कुमार को प्रतिवादी बनाते हुए एक स्वत्व वाद पटना के जिला न्यायालय में दायर कर रखा था। हालांकि उक्त वाद के आलोक में न्यायालय से किसी प्रकार का कोई नोटिस या आदेश जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद सिर्फ किसी उच्च अधिकारी मौखिक निर्देश पर पुलिस ने मेरे गृह निर्माण के कार्य को अवैध तरीके से बाधित किया।उन्होंने बताया की ऐसा लगता है कि स्थानीय पुलिस को गुमराह किया गया होगा अथवा किसी प्रकार के प्रलोभन के माध्यम से उन्हें ऐसा करने के लिए विवश किया गया होगा। हालांकि 10 फरवरी 2026 को सुनील कुमार पांडेय के द्वारा किए गए स्वत्व वाद संख्या- 393/2022 की सुनवाई करते हुए पटना जिला न्यायालय के सिविल जज द्वितीय प्रफुल्ल कुमार सिंह ने आदेश संख्या सी- 3211 दिनांक 10.02.26 जारी किया। जिसमें वादी सुनील कुमार पांडेय के दोनों आवेदन जो 14.10.22 तथा 19.04.25, जिसमें उक्त जमीन पर विधि निषेध औपचारिक समादेश निषेधाज्ञा की मांग की गई थी,को खारिज कर दिया गया।
अलका देवी ने अपने आवेदन में बताया कि यह आश्चर्य तथा विक्षोभ जनक तथ्य है कि राज्य सरकार के द्वारा जारी कई चेतावनियों के बावजूद पुलिस इस प्रकार के मामलों में विधि सम्मत कार्रवाई करने के बजाय माफिया तत्वों के मदद में अवैध तरीके से उतर जाती है।कानून के मुताबिक पुलिस बगैर किसी सक्षम प्राधिकार अथवा न्यायालय के आदेश के बगैर किसी के भूखंड पर निर्माण कार्य को नहीं रोक सकती है। इसके बावजूद मेरे गृह निर्माण के कार्य को रोका गया है। मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम तथा डीजीपी,आईजी पटना तथा एसएसपी पटना को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच करवाने के मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके गृह निर्माण के कार्य को बगैर किसी कोर्ट अथवा प्राधिकार के आदेश के पुलिस के द्वारा रोकने की घटना के छानबीन होनी चाहिए।ताकि ऐसी दूसरी घटना किसी अन्य व्यक्ति के साथ नहीं हो सके।उन्होंने कहा कि उनके मकान में किसी प्रकार के निर्माण पर रोक नहीं है। अतः वह अपने गृह निर्माण कार्य को बाधित करने वाले तत्वों के खिलाफ जरूरत पड़ा तो उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगी।

