पटना में प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस का लाठीचार्ज, मची अफरा-तफरी, कई घायल
पटना। नीट छात्रा की मौत को लेकर बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को महिलाओं का प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया। गांधी मैदान से विधानसभा घेराव के लिए निकली महिला कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने डाकबंगला चौराहे पर लाठीचार्ज किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस कार्रवाई में कई महिलाएं घायल हो गईं और प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गईं। घटना के बाद महिला संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत और मकसद
मंगलवार को छात्रा की मौत के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन से जुड़ी सैकड़ों महिला कार्यकर्ता गांधी मैदान से मार्च निकालकर विधानसभा की ओर बढ़ रही थीं। यह मार्च राज्य में महिलाओं, छात्राओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और अपराधों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अपराधियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
जेपी गोलंबर पर पहली रोक
दोपहर करीब साढ़े बारह बजे गांधी मैदान से मार्च की शुरुआत हुई। कुछ दूरी पर ही पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर महिलाओं को रोक दिया। यहां महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। काफी देर तक समझाने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुईं, तो उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ गईं।
डाकबंगला चौराहे पर तनाव
डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने एक बार फिर भारी बैरिकेडिंग कर महिलाओं को रोका। यहां स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। महिलाएं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। सड़क पर गूंज रहे नारों में सरकार पर अपराधियों को बचाने का आरोप लगाया जा रहा था। कई महिलाएं हाथों में पोस्टर लिए हुए थीं, जिन पर चुनावी वादों और मौजूदा हालात के बीच अंतर दिखाने वाले नारे लिखे थे।
पुलिस की समझाइश और लाठीचार्ज
डाकबंगला चौराहे पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कृष्ण मुरारी खुद बैरिकेडिंग के पास खड़े होकर महिलाओं को समझाने की कोशिश करते दिखे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे लौट जाएं, लेकिन महिलाएं विधानसभा की ओर बढ़ने पर अड़ी रहीं। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने पहले पानी की बौछार वाली गाड़ी मंगाई, लेकिन इससे पहले ही लाठीचार्ज का आदेश दे दिया गया। अचानक हुई कार्रवाई से भगदड़ मच गई। कई महिलाएं सड़क पर गिर पड़ीं और कुछ को गंभीर चोटें आईं।
बेटी बचाओ न्याय यात्रा की पृष्ठभूमि
महिला संगठनों ने बताया कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं था, बल्कि 4 फरवरी से चल रही बेटी बचाओ न्याय यात्रा का अंतिम चरण था। यात्रा की शुरुआत जहानाबाद से हुई थी और यह नीट छात्रा के गांव से होते हुए नालंदा, नवादा, गया और अरवल से गुजरकर सोमवार को पटना पहुंची थी। सोमवार को यात्रा के समापन के बाद मंगलवार को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम तय था।
महिला संगठनों के आरोप
ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा देखने को मिला। उनका आरोप है कि सरकार बने अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन अपराधियों और बलात्कारियों का मनोबल काफी बढ़ गया है। उन्होंने मांग की कि नीट छात्रा मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए और यह जांच अदालत की निगरानी में हो।
प्रशासन पर गंभीर सवाल
महिला संगठनों ने आरोप लगाया कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामलों में भी पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है। उनका कहना है कि परिजनों पर दबाव डाला गया, बयान बदलवाने की कोशिश हुई और सीसीटीवी फुटेज तथा फॉरेंसिक जांच से बचने का प्रयास किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जन दबाव के बाद ही जांच की अनुशंसा की गई, लेकिन न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी जरूरी है।
राज्य सरकार पर तीखा हमला
ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन की राज्य अध्यक्ष सोहिला गुप्ता ने कहा कि सरकार सिर्फ नारे देती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने कहा कि आज बिहार में ऐसा कोई इलाका नहीं बचा है, जहां महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। उनके मुताबिक दूधमुंही बच्ची से लेकर कामकाजी महिला तक, सभी असुरक्षित हैं और सरकार आंख मूंदे बैठी है।
इलाके में तनाव, राजनीति गरमाई
लाठीचार्ज की घटना के बाद डाकबंगला और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर दिया। वहीं, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा की है। विपक्ष ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।
बिहार में महिला सुरक्षा पर बहस
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, सरकार और प्रशासन के लिए यह घटना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासत और तेज होने के आसार हैं।


