January 23, 2026

नीट छात्रा मौत मामले में डिप्टी सीएम का बड़ा बयान, सम्राट बोले- पुलिस को खुली छूट, कोई नहीं बचेगा

  • कांग्रेस ने पटना में निकाला विरोध मार्च, सीबीआई जांच की मांग, परिजनों ने वार्डन व पुलिसकर्मियों पर लगाए गंभीर आरोप

पटना। राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सोमवार को इस घटना के विरोध में बिहार कांग्रेस के नेताओं ने पटना में विरोध मार्च निकाला और मामले में निष्पक्ष जांच व पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की। दूसरी ओर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पुलिस को पूरी छूट दी गई है और जो भी दोषी होंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने पटना की सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं के हाथों में तख्तियां थीं और वे न्याय की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। विरोध मार्च में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस का रवैया शुरू से ही संदेह के घेरे में रहा है। उन्होंने इस प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग करते हुए कहा कि जब तक स्वतंत्र एजेंसी जांच नहीं करेगी, तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाएगा। इधर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी जांच उच्च स्तर पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और पटना के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्वयं इस केस पर नजर रख रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है और एसआईटी अपना काम कर रही है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस को इस केस में पूरी छूट दी गई है और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा। मामले की पृष्ठभूमि में बताया गया है कि जहानाबाद जिले की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा इस महीने की शुरुआत में पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में स्थित एक निजी ‘गर्ल्स हॉस्टल’ के कमरे में बेहोशी की हालत में मिली थी। छात्रा नीट की तैयारी कर रही थी। परिजन और प्रशासन उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, जहां वह कई दिनों तक कोमा में रही। बाद में 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ही छात्रा की मौत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृत छात्रा के परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था और प्रशासन पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य नहीं है और इसमें कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।” हालांकि पुलिस का दावा है कि मेडिकल जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज में यौन हमले का कोई संकेत नहीं मिला है। पटना पुलिस ने 13 जनवरी को जारी अपने बयान में कहा था कि चिकित्सकों को यौन हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक चिकित्सा जांच में यह संकेत मिला था कि छात्रा ने बड़ी संख्या में नींद की गोलियां खा ली थीं, साथ ही वह टाइफाइड से पीड़ित थी। पुलिस का कहना है कि जांच हर पहलू से की जा रही है और सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, रविवार को मृतका के परिजनों ने वार्डन, चिकित्सकों और कुछ पुलिसकर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मृतका के पिता ने कहा कि छात्रावास प्रशासन के पदाधिकारियों ने समझौते के लिए पैसे की पेशकश की थी और कुछ पुलिसकर्मियों ने मीडिया से बात न करने की धमकी भी दी। परिवार ने आरोप लगाया कि शुरू से ही मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, इसलिए अब वे निष्पक्ष जांच चाहते हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक रूप से भी गर्म हो चुका है। एक ओर कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर सीबीआई जांच की मांग की है, तो दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि पुलिस और एसआईटी पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और हॉस्टल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और पीड़ित परिवार को कब और कैसे न्याय मिलता है।

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