February 23, 2026

11 को सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे पीएम मोदी, स्वाभिमान पर्व में लेंगे हिस्सा

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे। उनके इस दौरे को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक संगठनों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री इस अवसर पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे, जो 8 जनवरी से 11 जनवरी तक चार दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक स्मृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आत्मसम्मान के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह पर्व देश को यह याद दिलाता है कि भारतीय सभ्यता ने समय-समय पर आए संकटों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवित रखा है। इस चार दिवसीय आयोजन के दौरान आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से संत, विद्वान, कलाकार और श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इनमें विशेष पूजा, अभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक आरती शामिल हैं। इसके साथ ही आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें भारतीय दर्शन, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार साझा किए जा रहे हैं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोक कलाओं के जरिए भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित किया जा रहा है।
सामाजिक जागरूकता से जुड़ा संदेश
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर संवाद और गतिविधियां की जा रही हैं। आयोजकों का मानना है कि सांस्कृतिक उत्सव तभी सार्थक होते हैं, जब वे समाज को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करें।
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यातायात, पार्किंग, चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा दोनों का संतुलन बना रहे।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
सोमनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका स्थान भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की निरंतरता और पुनर्निर्माण की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। इतिहास में कई बार इस मंदिर को नष्ट किया गया, लेकिन हर बार यह और अधिक भव्य रूप में पुनः स्थापित हुआ। यही कारण है कि सोमनाथ मंदिर को आत्मसम्मान और अदम्य आस्था का प्रतीक कहा जाता है।
प्रधानमंत्री का लेख और ऐतिहासिक संदर्भ
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में एक लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि जनवरी 1026 में इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उस समय महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने का प्रयास किया था। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में इसे आस्था और सभ्यता के महान प्रतीक पर किया गया हिंसक और बर्बर आक्रमण बताया।
आस्था और पुनर्निर्माण की कहानी
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में यह भी उल्लेख किया कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास केवल विध्वंस की कहानी नहीं है, बल्कि पुनर्निर्माण और पुनर्जागरण की प्रेरक गाथा भी है। हर आक्रमण के बाद भारतीय समाज ने एकजुट होकर इस मंदिर को फिर से खड़ा किया। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, सामूहिक संकल्प और आस्था की शक्ति को दर्शाता है। सोमनाथ मंदिर इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सभ्यता को दबाया नहीं जा सकता, चाहे परिस्थितियां कितनी ही कठिन क्यों न हों।
राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा आयोजन
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा कार्यक्रम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसमें शामिल होना इस बात को और अधिक बल देता है कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल स्मरण नहीं कर रहा, बल्कि उसे आत्मसम्मान और प्रेरणा के स्रोत के रूप में देख रहा है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से सीख लेने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमनाथ मंदिर दौरा और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में उनकी सहभागिता धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह आयोजन भारत की आस्था, विरासत और आत्मसम्मान को एक साथ जोड़ता है। सोमनाथ मंदिर की प्राचीन परंपरा और आधुनिक भारत की चेतना का यह संगम न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता दिखाई दे रहा है।

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