पटना एम्स में पीजी छात्र ने की आत्महत्या की कोशिश, हालत गंभीर, कमरे से मिला सुसाइड नोट
- हॉस्टल के कमरे में नशीली दवा सेवन के बाद अचेत मिला छात्र, सहपाठियों ने बचाई जान
पटना। राजधानी स्थित पटना एम्स में एक पीजी प्रथम वर्ष के छात्र द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना सामने आई है, जिससे चिकित्सा परिसर में हड़कंप मच गया। छात्र की पहचान पश्चिम बंगाल के मुकुंदपुर निवासी डॉ. विश्वास कुमार के रूप में हुई है। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनका इलाज कर रही है। घटना शनिवार सुबह की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, डॉ. विश्वास अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, जिसके बाद उनके सहपाठियों को संदेह हुआ। जब वे छात्रावास स्थित उनके कमरे, जो कि कमरा संख्या 13 है, पर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बावजूद जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो साथियों ने खिड़की से झांककर देखा। अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए, क्योंकि डॉ. विश्वास बिस्तर पर अचेत अवस्था में पड़े थे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सहपाठियों ने तुरंत खिड़की तोड़कर कमरे में प्रवेश किया और बिना देर किए उन्हें आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच में पाया कि उन्होंने नशीली दवा का सेवन किया है, जिसके कारण उनकी हालत गंभीर हो गई। फिलहाल उन्हें निगरानी में रखा गया है और लगातार उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही फुलवारी शरीफ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। थाना प्रभारी गुलाम शाहबाज आलम ने बताया कि कमरे की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जो अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। नोट में लिखा है कि “कृपया मुझे जिंदा करने की कोशिश न करें, मुझे शांति से मरने दें।” इस नोट के मिलने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है और आगे की जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम को बुलाया गया है, ताकि साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि छात्र किसी प्रकार के मानसिक तनाव, पढ़ाई के दबाव या व्यक्तिगत कारणों से परेशान था या नहीं। अस्पताल प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और आंतरिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्थान के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं चिंताजनक हैं और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। मेडिकल शिक्षा में बढ़ते दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण कई बार छात्र मानसिक रूप से तनावग्रस्त हो जाते हैं, जिसके चलते इस तरह के कदम उठाने की घटनाएं सामने आती हैं। डॉ. विश्वास के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है और उनके पटना पहुंचने की संभावना है। परिवार के आने के बाद ही स्थिति के बारे में और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। इस बीच अस्पताल प्रशासन और पुलिस दोनों मिलकर मामले की हर पहलू से जांच कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और सहयोग की जरूरत है। समय रहते उचित परामर्श और सहायता मिलने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें डॉ. विश्वास कुमार की हालत पर टिकी हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।


