जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने पर अप्रैल से बंद हो सकती है पेंशन

  • 31 मार्च अंतिम तिथि, लाखों लाभार्थियों से समय पर प्रक्रिया पूरी करने की अपील
  • प्रमाणीकरण से डेटाबेस होगा अपडेट, फर्जीवाड़ा रोकने में मिलेगी मदद

पटना। बिहार के लाखों सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराया है, उनकी पेंशन अप्रैल महीने से बंद की जा सकती है। विभाग ने सभी पेंशनधारियों से अपील की है कि वे 31 मार्च तक हर हाल में अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें, अन्यथा भुगतान पर रोक लग सकती है। विभाग के अनुसार, जीवन प्रमाणीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। इस तिथि के बाद केवल उन्हीं लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान किया जाएगा, जिनका प्रमाणीकरण अद्यतन होगा। इसका सीधा असर उन पेंशनधारियों पर पड़ेगा, जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक 85 लाख 52 हजार से अधिक लाभार्थियों ने जीवन प्रमाणीकरण करा लिया है। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने यह जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की है। विभाग का कहना है कि यह अंतिम अवसर है और समय रहते प्रमाणीकरण कराना जरूरी है। जीवन प्रमाणीकरण की अनिवार्यता राज्य की कई प्रमुख पेंशन योजनाओं पर लागू होती है। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों को नियमित रूप से अपना प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पेंशन सही व्यक्ति तक पहुंच रही है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेंशन से जुड़े आंकड़ों को अद्यतन करना और मृत लाभार्थियों की पहचान करना है। इससे पेंशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और फर्जी लाभार्थियों को हटाकर वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना संभव हो सकेगा। लाभार्थियों की सुविधा के लिए जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पेंशनधारी अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र या वसुधा केंद्र पर जाकर आसानी से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है। ऐसे लाभार्थी, जिन्हें अंगुली के निशान के माध्यम से प्रमाणीकरण कराने में कठिनाई होती है, उनके लिए नेत्र स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए आंखों की पहचान के आधार पर प्रमाणीकरण किया जा सकता है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनकी उंगलियों के निशान स्पष्ट नहीं होते। इसके अलावा, जिन लाभार्थियों को बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण में समस्या आती है, उनके लिए भौतिक सत्यापन की भी व्यवस्था की गई है। ऐसे लोग अपने प्रखंड कार्यालय या जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग से संपर्क कर अपनी पहचान सत्यापित करा सकते हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पेंशन रोक दी जाएगी, लेकिन बाद में प्रक्रिया पूरी करने पर भुगतान पुनः शुरू किया जा सकता है। हालांकि, समय पर प्रमाणीकरण कराने से अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। समाज कल्याण विभाग ने सभी लाभार्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपनी प्रक्रिया पूरी करें। इससे न केवल उनकी पेंशन नियमित रूप से मिलती रहेगी, बल्कि सरकार की योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। जीवन प्रमाणीकरण अभियान पेंशन व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें सभी लाभार्थियों की भागीदारी आवश्यक है।