February 24, 2026

अंडमान के समंदर में पवन हंस हेलीकॉप्टर क्रैश, सात लोग थे सवार, तकनीकी खराबी से हादसा

नई दिल्ली। अंडमान में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब पवन हंस का एक हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण अंडमान सागर में उतरना पड़ा। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद आई खराबी के चलते पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए समुद्र में आपात लैंडिंग कराई। हेलीकॉप्टर में दो चालक दल के सदस्य समेत कुल सात लोग सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
उड़ान के तुरंत बाद आई खराबी
प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर के लिए रवाना हुआ था। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही पायलट को तकनीकी खामी का संकेत मिला। स्थिति को भांपते हुए पायलट ने जोखिम उठाने के बजाय समुद्र में नियंत्रित तरीके से आपात लैंडिंग करने का निर्णय लिया। बताया गया है कि हेलीकॉप्टर शॉर्ट लैंडिंग का शिकार हुआ, लेकिन पायलट की तत्परता के कारण बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलते ही बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सभी यात्री सुरक्षित
हेलीकॉप्टर में दो चालक दल के सदस्य और पांच यात्री सवार थे। बचाव कार्य के दौरान सभी को समुद्र से बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं, लेकिन कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। स्थानीय प्रशासन और तटरक्षक बल ने भी बचाव अभियान में सहयोग किया। घटना के बाद हेलीकॉप्टर को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पवन हंस की भूमिका
पवन हंस देश की प्रमुख सरकारी हेलीकॉप्टर सेवा कंपनी है। इसकी स्थापना वर्ष 1985 में की गई थी। कंपनी का मुख्य उद्देश्य दुर्गम और दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ना है। अंडमान-निकोबार जैसे द्वीपीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवा लोगों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन साधन है। दुर्गम पहाड़ी और समुद्री क्षेत्रों में नियमित उड़ान संचालन के कारण पवन हंस की सेवाओं का उपयोग आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों और नेताओं द्वारा भी किया जाता है। कंपनी के हेलीकॉप्टर आपातकालीन सेवाओं और राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
तकनीकी जांच के आदेश
घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि उड़ान के तुरंत बाद किस तरह की तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इंजन या अन्य यांत्रिक प्रणाली में खामी की आशंका जताई जा रही है। नागरिक उड्डयन से जुड़े अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के सटीक कारणों का खुलासा किया जाएगा। सुरक्षा मानकों की समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
हाल में हुई अन्य दुर्घटना
इसी बीच सोमवार को झारखंड में एक और हवाई दुर्घटना की खबर सामने आई थी। चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के जंगल में रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस हादसे में सात लोगों की जान चली गई। मृतकों में दो पायलट, एक डॉक्टर, एक नर्स, एक मरीज और उसके दो सहयोगी शामिल थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बीचक्राफ्ट बीई9एल विमान ने रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद उससे संपर्क टूट गया। बाद में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई। इस घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
अंडमान में पवन हंस हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग और झारखंड में एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने विमानन सुरक्षा पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। हालांकि अंडमान की घटना में सभी यात्री सुरक्षित बच गए, लेकिन तकनीकी खराबी की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्गम क्षेत्रों में उड़ान संचालन के दौरान अतिरिक्त सतर्कता और नियमित तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। पायलटों की त्वरित निर्णय क्षमता और बचाव दल की तत्परता ने इस बार बड़ा हादसा टाल दिया। फिलहाल अंडमान में स्थिति सामान्य है और सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस आपात लैंडिंग के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

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