लीबिया में फंसे पटना के प्रोफेसर की पुकार, पीएम मोदी से लगाई घर वापसी की गुहार
फुलवारीशरीफ, (अजीत)। युद्धग्रस्त लीबिया में पिछले कई वर्षों से फंसे पटना के राजेंद्र नगर निवासी प्रोफेसर संजीव कुमार ने स्वदेश वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगाई है। प्रोफेसर संजीव वर्तमान में लीबिया की एक यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग में कार्यरत हैं, लेकिन लंबे समय से बिहार लौटने की इच्छा के बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से भारत नहीं आ पा रहे हैं।वीजा समस्याओं और विश्वविद्यालय स्तर पर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होने के कारण भारत वापस नहीं आ पा रहे हैं। प्रोफेसर संजीव का मामला मानव अधिकार आयोग तक पहुंच चुका है। उन्होंने भारत सरकार और बिहार सरकार से अपील की है कि उन्हें लीगल एग्जिट वीजा और सहायक प्रोफेसर होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे विधिवत अपने देश लौट सकें। उन्होंने कहा है कि बकाया वेतन बाद में भी प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता सुरक्षित स्वदेश वापसी है। प्रोफेसर संजीव ने बताया कि वे वर्ष 2014 से ही स्वदेश लौटने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उनका कहना है कि कुछ कागजी और प्रक्रिया संबंधी अड़चनें हैं, जिनके कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि उनका पैतृक घर पटना के राजेंद्र नगर में है और उनके पिता एससीईआरटी पटना में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे हैं। वे अपने राज्य और देश की सेवा करना चाहते हैं तथा बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके कई शिष्य देश-विदेश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन वे स्वयं अपने वतन लौटने को तरस रहे हैं। प्रोफेसर संजीव ने भावुक अपील करते हुए कहा कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप कर लोगों की मदद करती थीं और आज उनकी कमी खल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि विदेश मंत्रालय को निर्देश देकर उनकी स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके कागजातों में कोई कमी है तो उसे स्पष्ट कर दूर करने का अवसर दिया जाए। भारत सरकार को इस मामले की जांच कर जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि वे सुरक्षित अपने देश लौट सकें। प्रोफेसर संजीव की यह अपील अब प्रशासन और सरकार के समक्ष एक मानवीय मुद्दे के रूप में खड़ी है, जिसमें एक शिक्षक अपने देश और अपनी मिट्टी में लौटकर सेवा करने की इच्छा जता रहा है। बताया जाता है कि त्रिपोली यूनिवर्सिटी में 2014-15 और 2015-16 के दौरान आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिसके कारण वर्ष 2017 में उन्हें 39 महीने के बदले केवल 21 महीने का वेतन दिया गया। इसी तरह अलमरगिब यूनिवर्सिटी में सेवा के दौरान भी उन्हें वैध वीजा उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रोफेसर संजीव के अनुसार उनके लगभग 1।5 करोड़ रुपये की बकाया राशि अभी भी फंसी हुई है। बिना वैध वीजा के विदेशी भूमि पर काम करना अवैध माना जाता है, जिससे उनकी पूरी सैलरी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम और हवाला नियमों के दायरे में जांच का विषय बन सकती है। इस कारण वे गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट में हैं उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने गांव, अपने घर और अपने राज्य बिहार लौटकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं। उनके पिता एससीईआरटी पटना में प्रोफेसर रह चुके हैं और उनका पैतृक मकान राजेंद्र नगर में है। प्रोफेसर संजीव ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि विदेश मंत्रालय के स्तर पर हस्तक्षेप कर उनकी कागजी बाधाएं दूर कराई जाएं और सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि किसी दस्तावेज में कमी है तो स्पष्ट कर उसे दूर करने का अवसर दिया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस अनिश्चितता का अंत हो सके।


