स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा रैंकिंग में पटना को देश में मिला 15वां रैंक, पुणे से भी बेहतर, नगर निगम की बड़ी उपलब्धि
पटना। बिहार की राजधानी पटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के लिए पटना को देशभर के बड़े शहरों में 15वां स्थान मिला है। यह रैंकिंग 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में दी गई है। खास बात यह है कि इस सूची में पटना ने महाराष्ट्र के पुणे जैसे बड़े और विकसित शहर को भी पीछे छोड़ दिया है। इसे पटना नगर निगम की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा रैंकिंग का महत्व
यह रैंकिंग उन शहरों के प्रयासों का आकलन करती है, जहां सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले सफाईकर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए गए हैं। लंबे समय से यह मुद्दा देशभर में चिंता का विषय रहा है कि मैनुअल सफाई और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के कारण स्वच्छता कर्मियों की जान जोखिम में पड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन शुरू किया है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पटना का चयन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जनवरी के अंत में आयोजित होने वाले एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पटना का चयन किया गया है। इस कार्यक्रम में देश के चुनिंदा शहरों को आमंत्रित किया गया है, जहां स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए उल्लेखनीय काम हुआ है। पटना को 65 शहरों में से 15वां स्थान मिला है, जो यह दर्शाता है कि नगर निगम द्वारा किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर सराहे जा रहे हैं।
टॉप 20 शहरों में पटना की जगह
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश के टॉप 20 शहरों की सूची तैयार की गई है। इस सूची में पहले स्थान पर विशाखापट्टनम है। इसके बाद जबलपुर, भोपाल, रायपुर, गाजियाबाद, ग्वालियर, नवी मुंबई, सूरत, अहमदाबाद और इंदौर जैसे शहर शामिल हैं। झारखंड का धनबाद 11वें स्थान पर है, जबकि बिहार से केवल पटना को इस श्रेणी में जगह मिली है। पटना के नीचे पुणे, राजकोट, नागपुर, जयपुर ग्रेटर और अलीगढ़ जैसे शहरों का नाम आता है। यह तुलना पटना के लिए खास तौर पर गर्व की बात मानी जा रही है।
मशीनीकरण पर दिया गया जोर
पटना नगर निगम के अनुसार शहर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मशीनीकरण को लगातार बढ़ावा दिया गया है। पहले जहां कई जगहों पर हाथ से सफाई की जाती थी, वहीं अब आधुनिक मशीनों के जरिए सीवर की सफाई कराई जा रही है। इससे न केवल काम की गति बढ़ी है, बल्कि सफाईकर्मियों को सीधे खतरनाक परिस्थितियों में उतरने से भी बचाया जा सका है।
सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण की व्यवस्था
नगर निगम ने स्वच्छता कर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया है। कर्मियों को हेलमेट, ग्लव्स, मास्क, बूट और अन्य आवश्यक पीपीई किट्स दिए गए हैं। मानसून के दौरान 604 सफाईकर्मियों को विशेष रूप से पीपीई किट्स उपलब्ध कराए गए थे, ताकि बारिश और जलभराव के समय भी वे सुरक्षित रह सकें। इसके साथ ही कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे मशीनों के सही इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों की जानकारी हासिल कर सकें।
सीवर में उतरने पर सख्त रोक
पटना नगर निगम ने यह स्पष्ट किया है कि सीवर और सेप्टिक टैंक के अंदर सफाईकर्मियों के उतरने पर सख्ती से रोक लगाई गई है। किसी भी आपात स्थिति में भी पहले मशीनी विकल्प अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम स्वच्छता कर्मियों की जान की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है और इसी नीति ने पटना की रैंकिंग सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के कदम
सिर्फ काम के तरीके ही नहीं, बल्कि स्वच्छता कर्मियों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। नगर निगम ने बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की है, ताकि किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में कर्मियों और उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके। इसके अलावा जागरूकता अभियानों के जरिए कर्मियों को उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है।
राष्ट्रीय मंच पर होंगे प्रयासों का प्रदर्शन
जनवरी के अंत में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में चयनित शहरों के प्रयासों को ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों और एक विशेष संकलन के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें नगर निकायों की अधिसूचनाएं, उपविधियां, मानक संचालन प्रक्रियाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और मशीनी सफाई व्यवस्था जैसे पहलुओं को दिखाया जाएगा। पटना के नवाचारों को भी इस मंच पर साझा किया जाएगा।
पटना के लिए गर्व का क्षण
इस उपलब्धि को पटना नगर निगम और शहर के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना यह दिखाता है कि सही नीतियों और इच्छाशक्ति से बदलाव संभव है। यह रैंकिंग न केवल नगर निगम के प्रयासों की सराहना है, बल्कि अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण है। स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा रैंकिंग में पटना का 15वां स्थान यह साबित करता है कि शहर ने इस दिशा में गंभीर और ठोस कदम उठाए हैं। मशीनीकरण, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा जैसे उपायों ने पटना को देश के अग्रणी शहरों की सूची में खड़ा कर दिया है, जो आने वाले समय में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जगाता है।


