पटना एम्स में कैंसर के 12 मरीजो को डिस्चार्ज करने की जानकारी मिलने से मरीजो के परिजन बेचैन,रो-रो कर गिड़गिड़ा रहे कैंसर पीड़ित बच्चों के परिजन
पटना/फुलवारीशरीफ (अजीत यादव)। पटना एम्स में कई माह से ब्लड कैंसर का इलाज करा रहे करीब बारह मरीजो को एम्स प्रशासन ने कोविड अस्पताल बनाये जाने की कवायद को लेकर मरीजो को दुसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया है। जिसे लेकर मरीजो के परिजन बेचैन हो गये है की अब ऐसी परिस्थतियो में ब्लड कैंसर के मरीजो को कहा लेकर जाएं।जिन मरीजो को एम्स ने डिस्चार्ज कर दुसरे अस्पतालों में ले जाने की सलाह दिया है उनमे 11 साल की समस्तीपुर की दीपा कुमारी , 11 साल के मो आदिल परवेज कटिहार , चार साल की अनी कुमारी , देवघर , 5 साल के रिशु कुमार , कहल गाँव भागलपुर , 13 साल के प्रिंस कुमार , हाजीपुर लाल गंज , 16 साल के मनेर निवासी रोहित कुमार , 17 साल के नितीश कुमार , सासाराम , 7 साल के इन्द्रजीत कुमार बेतिया , 23 साल के मधेपुरा निवासी रवि शंकर कुमार , 16 साल के न्वादाद निवासी अमरजित कुमार , सिवान के 55 साल के निवासी विजय कुमार प्रसाद शामिल है।मरीजो के परिजनों का कहना है की वे लोग एम्स में सस्ता और सरकारी सुविधा पर इलाज कराने आये थे और अब कोरोना संकट के बीच हमें यहाँ से मरीजो को दुसरे अस्पताल में ले जाना पड़ेगा तो हम कहा जायेंगे।कैंसर के इलाज में लाखो रूपये खर्च करने के बाद अब हमारे पास इलाज का एक रुपया नही है तो ऐसे में निजी हॉस्पिटल में इलाज करा पाना नामुमकिन है और अब सरकार व एम्स प्रशासन से लोग अपने मरीजो का वैकलिप इलाज की वयस्था करने की आस लगाये बैठे हैं।एम्स के पास आईजीआईएमएस और महावीर कैंसर संस्थान का ही विकल्प है जहाँ कोरोना को लेकर पहले से ही अव्यस्था का माहौल है।इस सम्बन्ध में एम्स निदेशक डॉ पीके सिंह ने कहा की सरकार ने एम्स को कोविड अस्पताल के रूप में बना रही है तो इस परिस्थितयो मे कैंसर और दुसरे गंभीर रोगों के मरीजो का इलाज में न्याय नही हो पा रहा है ।एम्स के अधिकांश चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ कोरोना मरीजो में लगे है।निदेशक ने कहा की हम अपनी ओर से इन कैंसर के मरिजो के वैकल्पिक इलाज और दुसरे अस्पताल में शिफ्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।


