पप्पू यादव के बिगड़े बोल, कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को बताया चोर, कहा- संत बन रहा चोर-उच्क्का
पटना। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इस बार उन्होंने मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को लेकर बेहद तीखी और विवादास्पद टिप्पणी की है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव के शब्द इतने कड़े थे कि सियासी और धार्मिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
पटना एयरपोर्ट पर बयान से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब पप्पू यादव पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पत्रकारों ने उनसे धीरेंद्र शास्त्री के हालिया बयान को लेकर सवाल किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तिरंगे में चांद आ गया तो देश सुरक्षित नहीं रहेगा। इस सवाल पर पप्पू यादव अचानक भड़क गए और उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह धीरेंद्र शास्त्री आखिर हैं कौन और उन्हें कथावाचक क्यों कहा जा रहा है।
कथावाचक कहे जाने पर भड़के पप्पू यादव
जब पत्रकारों ने यह स्पष्ट किया कि धीरेंद्र शास्त्री कथावाचक हैं और बागेश्वर धाम से जुड़े हुए हैं, तब पप्पू यादव ने उनकी तुलना चोर-उचक्कों से कर दी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को कथावाचक बनाकर पेश किया जा रहा है, जबकि न तो वे ओशो जैसे विचारक हैं और न ही आचार्य राममूर्ति जैसे विद्वान। उनके इस बयान ने तुरंत राजनीतिक और धार्मिक विवाद का रूप ले लिया।
सनातन धर्म से जोड़कर उठाए सवाल
पप्पू यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिन लोगों का सनातन धर्म से कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं है, उन्हें धर्म का ठेकेदार बनाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग न सनातन को समझते हैं और न ही उसकी परंपराओं को जानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे संतों का सम्मान होना चाहिए, जो सादगी और प्रेम का संदेश देते हैं।
इंद्रेश उपाध्याय पर भी साधा निशाना
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए पप्पू यादव ने केवल धीरेंद्र शास्त्री तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय पर भी टिप्पणी कर दी। उन्होंने हाल ही में जयपुर में हुई इंद्रेश उपाध्याय की शादी का जिक्र करते हुए उस पर हुए कथित भारी खर्च को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सैकड़ों करोड़ की शादियों और भव्य आयोजनों से आध्यात्मिकता का क्या संबंध है।
जयपुर की शादी और वीआईपी मेहमान
पप्पू यादव ने जिस शादी का जिक्र किया, वह दिसंबर की शुरुआत में राजस्थान की राजधानी जयपुर में संपन्न हुई थी। इस विवाह समारोह में देशभर से कई संत-महंत और नामी हस्तियां शामिल हुई थीं। वैदिक रीति-रिवाजों से हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में पंडितों ने अनुष्ठान कराए थे। इस आयोजन को लेकर पहले से ही सोशल मीडिया पर चर्चाएं चल रही थीं, जिन्हें पप्पू यादव के बयान ने और हवा दे दी।
धर्म और विचारधाराओं को लेकर टिप्पणी
पप्पू यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत को किसी एक ढोंगी विचारधारा की ओर नहीं, बल्कि विविध विचारधाराओं की ओर बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को कृष्ण के मार्ग, गुरु नानक के पथ, बुद्ध के सिद्धांतों और आंबेडकर की सोच पर चलने देना चाहिए। उनका कहना था कि भारत को जबरन किसी एक धार्मिक ढांचे में ढालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान की पृष्ठभूमि
जिस बयान को लेकर पप्पू यादव से सवाल पूछा गया था, वह हाल ही में उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है। वहां धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि अगर देश में राष्ट्रवाद कमजोर हुआ और तिरंगे में चांद जैसी स्थिति आई, तो समाज के किसी भी वर्ग का अस्तित्व सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने जातिवाद के बजाय राष्ट्रवाद पर जोर देने की बात कही थी।
राजनीति और धर्म के टकराव की नई बहस
पप्पू यादव के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीति और धर्म के बीच टकराव की बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, तो आलोचक इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
आगे क्या होगा सियासी असर
फिलहाल इस पूरे मामले पर धीरेंद्र शास्त्री या उनके समर्थकों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पप्पू यादव के बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। बिहार की राजनीति में पहले से ही मुखर रहने वाले पप्पू यादव के इस बयान ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों के केंद्र में ला दिया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका राजनीतिक और सामाजिक असर किस दिशा में जाता है।


