February 10, 2026

31 साल पुराने मुकदमे में पप्पू यादव को जमानत, जेल में ही रहेंगे, दो नए केसों में पुलिस ने मांगी रिमांड

पटना। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक आपराधिक मामले में मंगलवार को बड़ी राहत मिली है। विशेष सांसद-विधायक अदालत ने उन्हें इस पुराने मुकदमे में जमानत दे दी। हालांकि, यह राहत फिलहाल अधूरी ही मानी जाएगी, क्योंकि दो अन्य मामलों में पुलिस की प्रोडक्शन रिमांड मंजूर होने के कारण पप्पू यादव को अभी जेल से बाहर नहीं निकाला जाएगा। वे फिलहाल पटना की बेऊर जेल में ही रहेंगे।
31 साल पुराने मामले में मिली जमानत
मंगलवार को पप्पू यादव को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बेऊर जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। जमानत पर सुनवाई दोपहर दो बजे के आसपास शुरू हुई। सुनवाई के दौरान पप्पू यादव व्हीलचेयर पर बैठे नजर आए। अदालत में उनकी ओर से वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि यह मामला तीन दशक से अधिक पुराना है और वे जांच व ट्रायल में सहयोग करते रहे हैं। लंबी बहस के बाद अदालत ने इस पुराने केस में जमानत मंजूर कर ली।
दो नए मामलों में बढ़ी मुश्किल
हालांकि जमानत मिलने के बावजूद पप्पू यादव को तत्काल रिहाई नहीं मिल सकी। कोतवाली थाना और बुद्धा कॉलोनी थाना से जुड़े दो मामलों में पुलिस ने उनकी प्रोडक्शन रिमांड मांगी थी। अदालत ने पुलिस की इस मांग को स्वीकार कर लिया। इसका मतलब यह हुआ कि पप्पू यादव को इन दोनों मामलों में पूछताछ के लिए जेल में ही रखा जाएगा। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक वे बेऊर जेल में ही रहेंगे।
अदालत में भावुक हुए पप्पू यादव
सुनवाई के दौरान उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पप्पू यादव ने न्यायाधीश के सामने पटना पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। अपनी बात रखते हुए वे अचानक भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने कहा कि उनके साथ राजनीतिक द्वेष के तहत कार्रवाई की जा रही है। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के अनुसार, यह दृश्य काफी देर तक चर्चा का विषय बना रहा।
गिरफ्तारी के पीछे का घटनाक्रम
पप्पू यादव की गिरफ्तारी शुक्रवार देर रात 31 साल पुराने एक मामले में हुई थी। उस वक्त वे लगातार नीट छात्रा की मौत के मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे। पप्पू यादव इस मुद्दे को बिहार तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाने लगे थे। उन्होंने संसद परिसर के बाहर पोस्टर और बैनर के साथ प्रदर्शन भी किया था।
बम धमकी से टली थी सुनवाई
इस मामले में जमानत याचिका सोमवार को दाखिल की जानी थी, लेकिन उस दिन अदालत को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के कारण सभी न्यायिक कार्य रोक दिए गए थे। सुरक्षा कारणों से कोर्ट परिसर खाली करा लिया गया और दिनभर की सुनवाई स्थगित कर दी गई। इसी वजह से पप्पू यादव की जमानत पर सुनवाई भी एक दिन के लिए टल गई थी।
नीट छात्रा मामले की पृष्ठभूमि
नीट छात्रा की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है। पप्पू यादव इस मामले में कथित लापरवाही को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों के कथित ऑडियो क्लिप भी सार्वजनिक किए थे, जिनमें इलाज में अनदेखी के आरोप लगाए गए थे। उनका कहना था कि छात्रा को समय पर और सही इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उसकी जान चली गई।
जांच में अभी बाकी हैं कई कड़ियां
नीट छात्रा मौत मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। विशेष जांच दल अपने स्तर से जांच में जुटा हुआ है। अब तक 18 लोगों के डीएनए नमूनों की रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है। ताजा जानकारी के अनुसार पुलिस अब करीब 10 और संदिग्ध लोगों के डीएनए सैंपल लेगी। इसके अलावा छात्रा के बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।
बैंक डिटेल्स और दस्तावेजों की जांच
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि छात्रा की बैंक डिटेल्स खंगाली जाएं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके खाते में हर महीने कितनी राशि आती थी और किन-किन स्रोतों से पैसा भेजा जाता था। साथ ही छात्रा के जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि केस की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके।
सीबीआई जांच की सिफारिश
राज्य सरकार की ओर से इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की गई है। हालांकि, फिलहाल विशेष जांच दल ही मामले को आगे बढ़ा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में पूरे केस की समीक्षा की है और जो बिंदु अब तक छूट गए हैं, उन्हें तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की राह
एक ओर पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में जमानत मिलना उनके लिए कानूनी राहत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नए मामलों में रिमांड के चलते उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। नीट छात्रा मौत मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक और कानूनी असर और गहराने की संभावना है। फिलहाल पप्पू यादव बेऊर जेल में हैं और आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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