ओम बिरला के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष, लोकसभा में जल्द लाया जाएगा अविश्वास प्रस्ताव
नई दिल्ली। संसद के चालू बजट सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। अब यह टकराव एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। लोकसभा में विपक्षी दल एकजुट होकर स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने निष्पक्षता नहीं बरती और विपक्ष की आवाज को दबाया गया।
बजट सत्र में बढ़ा राजनीतिक तनाव
बजट सत्र की शुरुआत से ही लोकसभा में माहौल तनावपूर्ण रहा है। हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा सुचारु रूप से नहीं हो सकी। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब दिए बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कराना पड़ा। इस घटनाक्रम ने विपक्ष को और आक्रामक कर दिया।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
विपक्षी दलों के सूत्रों के अनुसार, लगभग सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियां स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमत हो चुकी हैं। जल्द ही इस संबंध में लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा जा सकता है। हालांकि अभी प्रस्ताव पर औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अगर यह प्रस्ताव लाया जाता है, तो यह लगातार दूसरे कार्यकाल में स्पीकर की कुर्सी संभाल रहे ओम बिरला के कामकाज पर सीधा सवाल होगा।
विवाद की जड़ में धन्यवाद प्रस्ताव
इस पूरे विवाद की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान हुई। सरकार की ओर से मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया था। इसके समर्थन में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। इसके बाद विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पहला वक्ता बनाया गया।
राहुल गांधी का भाषण और हंगामा
राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए डोकलाम और चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संदर्भ में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का जिक्र भी किया। इस पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर ने कई बार राहुल गांधी को टोकते हुए विषय से भटकने का आरोप लगाया।
अगले वक्ता की ओर बढ़ी कार्यवाही
हंगामे के बीच पीठासीन सदस्य कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल गांधी का भाषण पूरा हुए बिना ही अगले वक्ता की ओर सदन की कार्यवाही मोड़ दी। इसे विपक्ष ने अपने नेता का अपमान बताया। इसके विरोध में विपक्षी सांसदों ने आगे बोलने से इनकार कर दिया। नतीजतन, धन्यवाद प्रस्ताव बिना किसी विस्तृत चर्चा और प्रधानमंत्री के जवाब के ही पारित हो गया।
विपक्ष का आरोप और नाराजगी
विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। विपक्ष का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष सदन में करोड़ों मतदाताओं की आवाज होता है। यदि उसे ही अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाएगा, तो यह विपक्ष की आवाज दबाने जैसा है। इसी मुद्दे को आधार बनाकर विपक्ष अब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
स्पीकर का पक्ष
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री के सदन में न आने को लेकर भी विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया था। उन्होंने कहा था कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आते, तो उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था। स्पीकर के इस बयान पर भी विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे असंसदीय करार दिया।
लोकसभा की भूमिका पर बहस
इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा की कार्यप्रणाली और स्पीकर की भूमिका पर व्यापक बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का मानना है कि स्पीकर को सदन के सभी पक्षों के लिए समान दूरी बनाकर रखनी चाहिए। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर हंगामा कर कार्यवाही बाधित करता है और फिर निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
आगे क्या होगा
अगर विपक्ष वास्तव में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो यह संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना होगी। हालांकि, संख्या बल के लिहाज से सरकार की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इसके बावजूद यह प्रस्ताव सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई को उजागर करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संसद का यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या संवाद का कोई रास्ता निकल पाता है।


