विधान परिषद में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, मुख्यमंत्री होश में आओ के लगे नारे, मांगा इस्तीफा
पटना। बिहार विधान मंडल के परिसर में बुधवार को राजनीतिक तापमान उस समय बढ़ गया, जब राष्ट्रीय जनता दल के विधान परिषद सदस्यों ने विपक्ष की नेता राबड़ी देवी के नेतृत्व में राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी सदस्य विधान मंडल के प्रवेश द्वार पर एकत्र हुए और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग भी की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्य हाथों में पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर मुख्यमंत्री के खिलाफ नारे लिखे थे। “मुख्यमंत्री होश में आओ”, “विधायकों को धमकाना बंद करो” और “भ्रष्टाचारियों की सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगाए गए। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री सदन के भीतर विपक्षी सदस्यों को धमकाते हैं और उनके मंत्रियों का व्यवहार भी विपक्ष के प्रति अपमानजनक है। राजद एमएलसी ने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि सरकार बहस से बचने के लिए दबाव की राजनीति कर रही है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि हाल के दिनों में सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की जगह टकराव का माहौल बन गया है। पिछले कुछ दिनों से विधान परिषद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। हाल ही में सदन के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राबड़ी देवी के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा राबड़ी देवी के लिए प्रयुक्त एक शब्द को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इसे महिलाओं का अपमान बताया और इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। इस प्रकरण के बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री पर तीखी टिप्पणी की थी। विधान परिषद में एक दिन पहले भी माहौल गर्म रहा था। राजद के सदस्य सुनील कुमार और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी बहसबाजी हुई थी। दोनों पक्षों के बीच कथित तौर पर तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ, जिसकी चर्चा पूरे राजनीतिक गलियारे में रही। सोमवार से ही परिषद की कार्यवाही के दौरान सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच तल्खी साफ नजर आ रही है। इसी पृष्ठभूमि में बुधवार को विपक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। राजद सदस्यों का कहना है कि जब तक सरकार सदन में विपक्ष का सम्मान नहीं करेगी और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन नहीं करेगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन का माहौल बिगाड़ रहा है और जनहित के मुद्दों पर चर्चा से ध्यान भटका रहा है। सरकार का दावा है कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की कार्यवाही चला रही है और विपक्ष के आरोप निराधार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और टकराव की तीव्रता बढ़ सकती है। विधान परिषद में लगातार हो रही बहसबाजी और विरोध प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि राज्य की राजनीति में इस समय तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। फिलहाल सदन की कार्यवाही जारी है, लेकिन विपक्ष का रुख आक्रामक बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की स्थिति बनती है या टकराव और तेज होता है।


