ऑपरेशन चिराग में जुटे ललन सिंह, नीतीश की राह में आनेवाले कील-कांटों को दुरुस्त करने में लगें
पटना।जदयू के दूसरे सबसे बड़े कद्दावर नेता तथा सांसद ललन सिंह प्रदेश में सीएम नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की राह में पड़ने वाले सभी कील-कांटों को दुरुस्त करने में लग गए हैं।पार्टी के अंदर मुंगेर के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ही सबसे बड़े थिंकटैंक माने जाते रहे हैं।लोजपा के द्वारा जदयू के खिलाफ उम्मीदवारों को खड़ा किए जाने के संभावित घोषणा के मद्देनजर जदयू की ओर से ललन सिंह ने मोर्चा थाम लिया है।ललन सिंह ने वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के उपरांत नीतीश कुमार को बतौर मुख्यमंत्री बहुमत हासिल करने के लिए काफी मेहनत मशक्कत की थी।मगर तब बहुमत से आंकड़े काफी दूर रहने की वजह से सफलता हासिल नहीं हो सकी थी।गौरतलब है कि 2005 के फरवरी विधानसभा चुनाव के बाद लोजपा को तोड़ने में जदयू की ओर से ललन सिंह की अहम भूमिका थी।लोजपा के मजबूत सवर्ण सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए ललन सिंह ने ही पूरा ताना-बाना बुना था। नतीजतन लोजपा के 24 विधायक टूट गए तथा जदयू में शामिल हो जिसके बाद 2005 के नवंबर विधानसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह से बिहार एनडीए के पक्ष में आया।इसी चुनाव के बाद नीतीश कुमार के बिहार के सीएम के रूप में ताजपोशी हुई।कहा जा रहा है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के द्वारा जदयू को दी गई चुनौती के बाद की जदयू की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।अपनी रणनीति के मुताबिक लोजपा बिहार में जदयू तथा उसके सहयोगी हम के खिलाफ प्रत्याशी देने जा रही है।लोजपा बिहार में भाजपा खिलाफ प्रत्याशी नहीं देगी। ऐसे में जदयू के लिए भाजपा के अपेक्षा अधिक सीटें हासिल करना बड़ी चुनौती साबित होगी।इसलिए संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर जदयू के थिंक टैंक माने जाने वाले सांसद ललन सिंह अभी से ही सीएम नीतीश कुमार के रास्ते में पड़ने वाले कील-कांटों को दुरुस्त करने में लग गए हैं।बताया जाता है कि पिछले 25 वर्षों से सीएम नीतीश कुमार की राजनीतिक राह में आने वाले रोड़ों को हटाने का काम ललन सिंह ही करते आ रहे हैं।ऐसे में लोजपा के लिए जदयू के समक्ष चुनौती बनकर उभरने का राजनीतिक समाधान ढूंढने में अभी से ललन सिंह लग गए हैं।


