श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मनु और शतरूपा की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता
- निर्मल मन में ही होता है भगवान का वास: सुधीर जी महाराज
बिक्रम, गोपाल विद्यार्थी। नगर बाजार के वृंदावन कॉलोनी में श्री श्री 1008 श्री गदाधराचार्य माचा स्वामी के पुण्य स्मृति में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को मनु और शतरूपा की कथा सुनाइ गई। कथा प्रवचन करते हुए कथा वाचक सुधीर जी महाराज ने मनु और शतरूपा की कथा सुनाई। कहा कि मनु और शतरूपा को संतान नहीं हुई तो वह अपना राज पाठ छोड कर हजारों वर्ष तक तपस्या करने के लिए पर्वत पर चले गए। वह कठिन तपस्या करने लगे, मनु शतरूपा की इस कठिन तपस्या को देखकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने प्रभु से उनके जैसा ही पुत्र होने का वर मांग लिया। प्रभु हैरत में पड़ गए। उन्होंने कहा कि राजन तुम द्वारकापुरी में निवास करो और द्वापर युग में तुम अयोध्या के राजा दशरथ हो के जन्म लोगे और माता शतरूपा कौशल्या होगी। तब हम तुम्हारे घर में जन्म लेंगे। इस कथा को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा का शुभारंभ प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अभिषेक गोलवारा, वार्ड पार्षद स्मिता गुप्ता, बिक्रम व्यवसायिक एकता संघ के अध्यक्ष रवि प्रकाश, सरपंच बितेश्वर पंडित एवं समाजसेवी अनिल विश्वकर्मा , सुनीता क्लिनिक के संचालक बबलू जी के द्वारा संयुक्त रूप से ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित कर किया | मौके पर आयोजन मंडली में महावीर सेवा समिति के अध्यक्ष मदन दास, रिटायर्ड दरोगा दिनेश सिंह, अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य सभा के अध्यक्ष मंजित गुप्ता, ओनू गुप्ता, अजय गुप्ता, गुड्डू गुप्ता, श्रीराम पप्पू, श्याम , रंजीत गोस्वामी, राहुल, निक्कू, पिंटू, नितीश, गोलू, चमन राज,अन्य सदस्य उपस्थित रहे ।


