January 1, 2026

चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर रहेगी आयोग की नजर, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होने वाला है। मतदान से 48 घंटे पहले यानी 4 नवंबर की शाम पांच बजे से पूरे राज्य में चुनाव आयोग द्वारा घोषित “साइलेंस पीरियड” लागू होगा। इस दौरान सभी राजनीतिक दल, उम्मीदवार और उनके समर्थक किसी भी प्रकार के प्रचार या मतदान को प्रभावित करने वाले संदेश प्रसारित नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था मतदाता को स्वतंत्र और प्रभावहीन निर्णय लेने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
साइलेंस पीरियड का महत्व
चुनाव आयोग के अनुसार, साइलेंस पीरियड लोकतंत्र की आत्मा है। जब सारा प्रचार और शोर-शराबा थम जाता है, तब मतदाता को सोचने का अवसर मिलता है कि किसे वोट देना है। इस समय किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को प्रचार, भाषण या पोस्टर के माध्यम से मतदाता पर दबाव डालने की अनुमति नहीं है। इसका लक्ष्य है कि मतदाता पूरी तरह स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सके।
कानून और नियम
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126(1)(B) के तहत, मतदान से 48 घंटे पहले और मतदान समाप्त होने तक किसी भी प्रकार का चुनावी प्रचार या ‘इलेक्शन मैटर’ जनता तक पहुंचाना निषिद्ध है। ‘इलेक्शन मैटर’ में वह सभी सामग्री शामिल है जो किसी उम्मीदवार या दल के पक्ष में माहौल बनाती है या मतदाता के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। नियमों का उल्लंघन करने पर दो साल की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी
इस बार चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के लिए भी सख्त नियम लागू किए हैं। मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी टीवी चैनल, रेडियो, वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चुनाव से जुड़ी प्रचार सामग्री, ओपिनियन या वीडियो प्रसारित करना वर्जित रहेगा। फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब, व्हाट्सऐप समूह और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर किसी उम्मीदवार या दल के पक्ष में संदेश साझा करने पर आयोग तुरंत कार्रवाई करेगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए विशेष मॉनिटरिंग टीमें गठित की हैं, जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हो रहे किसी भी उल्लंघन पर नजर रखेंगी।
ऑनलाइन विज्ञापन और प्रमाणन
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन विज्ञापन और राजनीतिक पोस्टरों के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। इसका अर्थ है कि कोई भी उम्मीदवार या दल सीधे विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकता। पहले उसकी सामग्री का सत्यापन और प्रमाणन आयोग द्वारा किया जाएगा। यह व्यवस्था मीडिया को जिम्मेदार और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। अखबारों में छपने वाले चुनावी विज्ञापन भी इसी प्रमाणन प्रक्रिया के तहत ही प्रकाशित किए जा सकते हैं।
प्रचार के लिए शारीरिक और सार्वजनिक स्थानों पर रोक
साइलेंस पीरियड में केवल डिजिटल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि शारीरिक प्रचार पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। इस अवधि में सार्वजनिक सभाएं, जुलूस, रैलियां, स्कूल या धार्मिक स्थल के पास राजनीतिक भाषण करना निषिद्ध होगा। लाउडस्पीकर और किसी भी ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग तत्काल प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने प्रमुख जिलों जैसे पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में पहले ही माइक और रैली वैन की निगरानी शुरू कर दी है।
कंट्रोल रूम और निगरानी
चुनाव आयोग ने जिले-दर-जिले कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। इन रूमों से सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रचार गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था साइलेंस पीरियड के दौरान प्रचार करती है, तो संबंधित व्यक्ति पर तत्काल कार्रवाई होगी। आयोग की यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि मतदान के अंतिम चरण में मतदाता बिना किसी दबाव या प्रचार के स्वतंत्र निर्णय ले सके।
उल्लंघन पर कार्रवाई
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि साइलेंस पीरियड का उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाएगा। कानून के तहत उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दो साल की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। डिजिटल मीडिया में किसी भी प्रकार के प्रचार, टीवी या रेडियो संदेश, सोशल मीडिया पोस्ट और अखबार में बिना प्रमाणन विज्ञापन को तत्काल रोका जाएगा। साइलेंस पीरियड बिहार विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का अहम उपकरण है। यह मतदाता को सोचने का समय देता है और चुनावी प्रचार के शोर से दूर रहकर स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर प्रदान करता है। सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर आयोग की सख्त निगरानी, सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार पर रोक और कंट्रोल रूम की स्थापना इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाती है। इस अवधि में नियमों का पालन करना सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की जिम्मेदारी है। इससे मतदाता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित होती हैं।

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