January 26, 2026

बिहार सरकार ने केंद्र से कहा : बच्चों के पास गैजेट नहीं, इसलिए ई-लॉट्स ऐप से पढ़ाई का फायदा नहीं

पटना। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण दूरदर्शन बिहार और आनलाइन एप ई-लॉट्स के माध्यम से बच्चों की कक्षाएं जारी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चे इस सुविधा का लाभ उठाने सं वंचित हैं। सोमवार को इस बात को बिहार सरकार ने भी माना। देश के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई बैठक में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए जुड़े राज्य के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि सरकारी स्कूल के ज्यादातर बच्चों के पास डेडिकेटेड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं हैं। जिससे स्कूली बच्चे आनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि बच्चों की आनलाइन पढ़ाई के लिए उपयुक्त डिजिटल डिवाइस उन्हें राज्य की ओर से देना होगा। इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रावधान करने का अनुरोध किया गया है। बिहार सरकार उक्त अभियान के तहत 2021-22 के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड में इसे अप्रूवल के लिए लाएगी। अगर इसे अप्रूवल मिल गया तो राज्य सरकार बच्चों को स्मार्टफोन दे सकेगी और डाटा की सुविधा उपलब्ध करा सकेगी।
कैच-अप कोर्स की तैयारी पूरी
संजय कुमार ने बैठक में जानकारी दी कि राज्य में पहली, छठी और नौवीं कक्षा के अतिरिक्त अन्य सभी कक्षाओं में लगभग 36 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया था। इसके लिए मार्च 2021 में बड़े पैमाने पर नामांकन अभियान चलाया गया। बीते शैक्षणिक सत्र में सुचारू रुप से विद्यालय नहीं चलने के कारण बच्चों में ‘लॉस आॅफ लर्निंग’ सामने आया है। इसे कम करने के लिए अप्रैल 2021 से तीन माह के कैच-अप कोर्स की संपूर्ण तैयारी पूर्ण कर ली गई है। लेकिन विद्यालय बंद होने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट हो
बैठक में बताया गया कि बिहार ने संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के आलोक में स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति और नियंत्रण का दायित्व पंचायती राज संस्थाओं को सौप दिया है। नई शिक्षा नीति 2020 में पंचायती संस्थाओं की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए अनुरोध किया गया कि पंचायती राज संस्थाओं को शक्ति हस्तांतरण की भावना के आलोक में नई शिक्षा नीति 2020 में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को स्पष्ट किया जाए।

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