January 16, 2026

नीतीश को जरूर मिलना चाहिए भारतरत्न, प्रधानमंत्री जल्द बिहार के लाल को देंगे बड़ा सम्मान: जीतनराम मांझी

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई बहस ने जोर पकड़ लिया है। यह बहस किसी चुनाव, गठबंधन या नीतिगत फैसले को लेकर नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग ने राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को नया आयाम दे दिया है। इस मांग के पीछे तर्क भी हैं, समर्थक भी हैं और इसे समय की जरूरत बताने वाली आवाजें भी।
भारतरत्न की मांग कैसे शुरू हुई
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग सबसे पहले जनता दल यूनाइटेड के पूर्व नेता केसी त्यागी ने सार्वजनिक रूप से उठाई। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास, सुशासन और सामाजिक सुधारों में नीतीश कुमार के योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। त्यागी के इस बयान के बाद यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
नीतीश कुमार का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर
नीतीश कुमार पिछले तीन दशकों से बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने बिहार को उस दौर से बाहर निकालने का प्रयास किया, जब राज्य अव्यवस्था, खराब कानून-व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी के लिए जाना जाता था। उनके नेतृत्व में सड़कों का जाल बिछा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ, स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच बढ़ी और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर दिया गया। नीतीश कुमार की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जिन्होंने विकास के साथ सामाजिक न्याय को जोड़ने की कोशिश की। महिला सशक्तिकरण के लिए शराबबंदी, पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण और छात्राओं के लिए योजनाओं जैसे फैसलों ने उन्हें एक अलग राजनीतिक पहचान दी।
जीतनराम मांझी का समर्थन और बयान
इस मांग को तब और बल मिला, जब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतनराम मांझी ने खुलकर इसका समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “भारत रत्न नीतीश कुमार” शब्द सुनने में कितना अच्छा लगेगा। मांझी ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से सबको चौंकाते हुए नीतीश कुमार को यह बड़ा सम्मान देंगे। मांझी के बयान को केवल राजनीतिक शिष्टाचार नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नीतीश कुमार के प्रति उनके लंबे समय से रहे सम्मान और सहयोग का प्रतीक भी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलावों में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
बिहार के विकास में नीतीश कुमार की भूमिका
नीतीश कुमार के समर्थकों का मानना है कि उनके कार्यकाल में बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। कभी अपराध और पलायन के लिए चर्चित बिहार आज बुनियादी ढांचे, सड़कों और निवेश की संभावनाओं के लिए पहचाना जाने लगा है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की संख्या बढ़ी, शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं और छात्राओं के लिए योजनाएं शुरू की गईं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया गया और ग्रामीण इलाकों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश हुई। सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था को लेकर भी उनके फैसलों को अक्सर उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का लंबा और अपेक्षाकृत स्थिर राजनीतिक करियर उन्हें भारत रत्न जैसे सम्मान के योग्य बनाता है। उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने कई बार सत्ता में रहते हुए कठिन और अलोकप्रिय फैसले लिए, लेकिन उन्होंने जनहित को प्राथमिकता दी। यही बात उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। विश्लेषकों के अनुसार, यह मांग केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की भावनाओं से भी जुड़ रही है। बिहार के कई लोग मानते हैं कि नीतीश कुमार ने राज्य की दिशा और दशा बदलने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री से उम्मीदें और राजनीतिक संकेत
इस पूरे विमर्श के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी लगातार लिया जा रहा है। जीतनराम मांझी और अन्य समर्थकों का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री इस मांग पर विचार करते हैं, तो यह फैसला केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश होगा। भारत रत्न जैसे सम्मान का फैसला केवल योग्यता नहीं, बल्कि समय और परिस्थितियों से भी जुड़ा होता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग को किस नजरिए से देखती है।
बिहार और देश के लिए प्रतीकात्मक महत्व
यदि नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा। इसे बिहार के विकास, सुशासन और सामाजिक बदलाव की पहचान के रूप में भी देखा जाएगा। समर्थकों का मानना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि ईमानदारी, निरंतर मेहनत और जनहित में किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होती है। फिलहाल यह मांग चर्चा और बहस के दौर में है। लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की आवाज ने बिहार की राजनीति को एक नया विमर्श दे दिया है, जो आने वाले समय में और गहराता दिख सकता है।

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