January 16, 2026

पटना में चिराग पासवान और चेतन आनंद के दही चूड़ा भोज में शामिल हुए सीएम नीतीश, कई मंत्रियों ने की शिरकत

पटना। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर सौहार्द और सामाजिक मेलजोल का दृश्य देखने को मिला। राजधानी पटना में आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति ने न केवल पर्व की गरिमा बढ़ाई, बल्कि राजनीतिक संदेश भी दिए। एक ओर वे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, तो वहीं दूसरी ओर जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इन आयोजनों में कई मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
मकर संक्रांति और दही-चूड़ा की परंपरा
बिहार में मकर संक्रांति का पर्व सामाजिक समरसता और आपसी मेलजोल का प्रतीक माना जाता है। इस दिन दही-चूड़ा भोज का विशेष महत्व होता है, जिसमें राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आम लोग एक-दूसरे के साथ बैठकर पर्व मनाते हैं। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दल अपने कार्यालयों और नेताओं के आवास पर भोज का आयोजन करते हैं। ऐसे कार्यक्रम केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं होते, बल्कि इनके जरिए राजनीतिक रिश्तों की गर्माहट भी दिखाई देती है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री
गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे पहले लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
श्रद्धांजलि और राजनीतिक शिष्टाचार
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह क्षण भावनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। रामविलास पासवान का बिहार की राजनीति में लंबा योगदान रहा है और नीतीश कुमार के साथ उनके संबंधों को भी राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण माना जाता रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख चेहरे
इस अवसर पर बिहार सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, सांसद अरुण भारती, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और गणमान्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने एक-दूसरे को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं और दही-चूड़ा भोज का आनंद लिया।
जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पर आयोजन
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गर्दनीबाग स्थित 12/20 मंत्री एन्क्लेव पहुंचे, जहां जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पर जदयू द्वारा दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। यहां भी मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। चेतन आनंद ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया, जिसे राजनीतिक सौजन्य और सम्मान के रूप में देखा गया।
दूसरे कार्यक्रम में शामिल नेता
इस कार्यक्रम में भी कई प्रमुख नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद लवली आनंद, विधायक श्याम रजक, विधायक रत्नेश सादा, पूर्व सांसद आनंद मोहन समेत बड़ी संख्या में जदयू के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आम लोग मौजूद थे। सभी ने मिलकर पारंपरिक अंदाज में दही-चूड़ा भोज किया और मकर संक्रांति की खुशियां साझा कीं।
राजनीतिक संदेश और महत्व
इन दोनों आयोजनों को केवल पर्व के उत्सव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल और आपसी विश्वास को दर्शाती है। खासकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यक्रम में नीतीश कुमार की मौजूदगी को एनडीए के भीतर एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं जदयू के अंदरूनी कार्यक्रम में उनकी सक्रियता पार्टी संगठन को मजबूत करने का संदेश देती है।
पर्व, परंपरा और राजनीति का संगम
मकर संक्रांति जैसे पर्व बिहार की राजनीति में हमेशा खास रहे हैं। दही-चूड़ा भोज के जरिए नेता जनता और कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ते हैं। इस तरह के आयोजनों में औपचारिक भाषणों से ज्यादा अनौपचारिक संवाद और सौहार्द पर जोर रहता है। यही वजह है कि ऐसे कार्यक्रमों को जनता और कार्यकर्ता दोनों ही उत्साह से देखते हैं। पटना में आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रमों ने मकर संक्रांति के पर्व को राजनीतिक और सामाजिक दोनों रूपों में खास बना दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी, विभिन्न दलों के नेताओं की शिरकत और पारंपरिक उत्सव ने यह दिखाया कि बिहार की राजनीति में पर्व और परंपरा आज भी आपसी संवाद और मेलजोल का अहम माध्यम बने हुए हैं।

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