राजपूत वोटों के लिए नीतीश कुमार का ‘पाखंड प्रयास’,कांग्रेस प्रवक्ता ने चलाएं जमकर तीर

पटना। राष्ट्र रत्न वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के बहाने प्रदेश में राजपूत वोटों को अपने पक्ष में करने के जदयू की कवायद को प्रदेश कांग्रेस ने एक पाखंडी प्रयास करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने जदयू पर निशाना साधते हुए कहा कि राजपूत वोटों को ‘बंधुआ’ ना समझें। उन्होंने कहा कि राजपूतों ने किसी भी कालखंड में सत्ता के लिए स्वाभिमान से समझौता नहीं किया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जदयू के शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजपूत नेताओं को अपने ‘पॉकेट’ में रखना चाहते हैं। लेकिन उनका यह दिवास्वप्न कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश का राजपूत समाज बेहद सक्रिय तथा समझदार है। समाज भली-भांति जानती है कि कौन सी पार्टी तथा कौन सी सरकार की नीतियां तथा एजेंडा उनकी सत्ता में राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करता है। प्रदेश के नामी राजपूत समाज से आने वाले राजनेताओं का उल्लेख करते हुए राजेश राठौड़ ने कहा कि जब नीतीश कुमार 90 के दशक में समता पार्टी का निर्माण किए थे। उस वक्त जब वे राजनीतिक हाशिए पर आ गए थे। तब आनंद मोहन, दिग्विजय सिंह तथा प्रभुनाथ सिंह जैसे राजपूत नेताओं ने नीतीश कुमार की राजनीति को संभाला था। जनता जानती है कि बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किस कदर उनकी राजनीति को समाप्त करने का काम किया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि समता पार्टी के निर्माण के समय से लेकर मुख्यमंत्री के पद पर नीतीश कुमार के आसीन होने तक राजपूतों ने उनकी जमकर मदद की मगर इसके उलट नीतीश कुमार एक-एक कर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में राजपूत समाज के राजनीतिक सूरमाओंं को समाप्त करने का काम किया। आज भी प्रदेश के विभिन्न कद्दावर नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों के खिलाफ हैं। यहां तक कि उनके कैबिनेट में लगभग 10 वर्ष तक मंत्री रहने वाले नरेंद्र सिंह ने भी उनके ही खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

उन्होंने कहा कि यहां उल्लेखनीय है कि 2005 में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे, तब लोजपा के बागी विधायकों को एकजुट कर नीतीश के समर्थन में लाने के लिए लोजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बड़ी मशक्कत की थी। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने में कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह के योगदान को दरकिनार नहीं किया जा सकता। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि कांग्रेस पार्टी शुरू से राजपूत समाज के स्वाभिमान की रक्षा करते आ रही है। कांग्रेस ने सत्येंद्र नारायण सिन्हा एवं चंद्रशेखर सिंह जैसे दो-दो मुख्यमंत्री बिहार को दिया, वहीं निखिल कुमार जैसे वरिष्ठ नेता को राज्यपाल भी बनाया। वर्तमान राजनीतिक समीकरण में जदयू को लगता है कि दोबारा सत्ता में वापस होना नामुमकिन है, तब इन्हें अब राजपूत समाज एवं राजपूत वोटों की याद आ रही है। महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पूरे देश में कल मनाई गई थी। मगर बिहार में आज मनाई जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने इसका तात्पर्य समझाते हुए कहा कि महाराणा प्रताप जैसे शूरवीर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती तो उनकी पुण्यतिथि कल ही आयोजित की जाती। मगर जदयू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जल-जीवन-हरियाली वाली ड्रीम प्रोजेक्ट के चलते महाराणा प्रताप के पुण्यतिथि को एक दिन बाद मना रही है। राजेश राठौड़ ने कहा कि समाज देख रहा है तथा जनता जान रही है। किस प्रकार बिहार में ‘दृश्यभ्रम’ पैदा करके जनता को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। घोटालों के अंबार में खड़ी तथा जालिम राज के पराकाष्ठा से सराबोर जदयू के पास और दूसरा कोई विकल्प भी तो नहीं। कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि राजपूत समाज घास की रोटी खा लेगा लेकिन पुन: नीतीश कुमार के साथ नहीं जाएगा।

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