बिहार में वार्ड सदस्यों को सालाना 2 लाख का फंड देगी नीतीश सरकार, जल्द होगी घोषणा
पटना। बिहार सरकार ग्रामीण स्तर पर विकास को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर अब ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को भी सीधे विकास कार्यों के लिए वार्षिक फंड दिए जाने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक वार्ड सदस्य को सालाना दो लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि वार्ड स्तर पर छोटी लेकिन जरूरी विकास योजनाओं के लिए उपयोग में लाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में संतुलित विकास को गति मिलेगी और स्थानीय जरूरतों का समाधान तेजी से हो सकेगा।
विधान परिषद में दी गई जानकारी
इस अहम फैसले की जानकारी सोमवार को बिहार विधान परिषद में दी गई। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने एमएलसी सौरभ कुमार के प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि वार्ड सदस्यों को वित्तीय अधिकार देने से पंचायत स्तर पर लोकतंत्र और मजबूत होगा। मंत्री के अनुसार, सरकार जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी और स्वीकृति मिलते ही योजना को लागू कर दिया जाएगा।
वार्ड सदस्यों की भूमिका होगी मजबूत
मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में वार्ड सदस्य पंचायत की सबसे निचली इकाई के प्रतिनिधि होते हैं, लेकिन उनके पास विकास कार्यों के लिए स्वतंत्र रूप से खर्च करने का अधिकार नहीं है। वार्ड स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें अक्सर मुखिया या पंचायत समिति पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि वार्ड सदस्यों को अलग से सालाना दो लाख रुपये का फंड मिलेगा, तो वे अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाएं बना सकेंगे।
मनरेगा और अन्य कोष से अधिकार देने की तैयारी
ग्रामीण विकास मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पंचायत के मुखिया को सालाना लगभग दस लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार है। अब सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि वार्ड सदस्यों को भी मनरेगा और अन्य कोष से योजनाओं के चयन और राशि खर्च करने का अधिकार दिया जाए। इस विषय पर केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है।
सदन में लंबी चर्चा
इस मुद्दे पर विधान परिषद में करीब तीस मिनट तक विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य सच्चिदानंद राय ने कहा कि कई बार यह देखा गया है कि मुखिया उन वार्डों में अधिक राशि खर्च करते हैं, जहां उन्हें चुनाव में ज्यादा वोट मिले होते हैं। ऐसे में जिन वार्डों में अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला हो, वहां विकास कार्य पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वार्ड सदस्यों को फंड मिलने से इस तरह की असमानता कम होगी।
विभिन्न सदस्यों की राय
पूर्व मंत्री संतोष सिंह ने चर्चा के दौरान मांग की कि मनरेगा, पंद्रहवें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि खर्च करने का अधिकार भी वार्ड सदस्यों को दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि वार्ड सदस्य सीधे जनता से जुड़े होते हैं और उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं की सबसे बेहतर समझ होती है। वहीं, सदस्य दिनेश सिंह ने कहा कि वार्ड सदस्य चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन उन्हें अब तक पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं। इससे उनकी भूमिका केवल नाममात्र की रह जाती है।
पंचायती राज मंत्री की अपील
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस चर्चा के दौरान कहा कि वार्ड सदस्यों को पंचायत की बैठकों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी वार्ड सदस्यों को मिलकर पंचायत स्तर पर योजनाओं पर सहमति बनानी चाहिए, ताकि पूरे पंचायत क्षेत्र में संतुलित विकास हो सके। उनका मानना था कि केवल फंड देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समन्वय और सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है।
शिलापट्ट और प्रतिनिधियों का सम्मान
विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी इस दौरान एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विकास योजनाओं के शिलापट्ट पर संबंधित क्षेत्र के विधान पार्षद का नाम विधायक से पहले अंकित होना चाहिए। साथ ही, ऐसे कार्यक्रमों में विधान पार्षदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि इस संबंध में राज्य सरकार का आदेश पहले से जारी है और उसका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन
ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि कई जिलों में जिलाधिकारियों को निर्देश देकर शिलापट्ट में सुधार कराया गया है। जहां भी त्रुटियां पाई जाती हैं, उन्हें ठीक किया जा रहा है। इस दौरान सदस्य संजय कुमार सिंह ने मोरवा विधानसभा क्षेत्र का एक मामला उठाया, जहां एक शिलापट्ट पर विधायक का नाम बड़े अक्षरों में और केंद्रीय राज्य मंत्री का नाम छोटे अक्षरों में लिखा गया था। मंत्री अशोक चौधरी ने इस पर संबंधित कार्यपालक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
ग्रामीण विकास की नई दिशा
वार्ड सदस्यों को सालाना दो लाख रुपये का फंड देने की प्रस्तावित योजना को ग्रामीण लोकतंत्र के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार से स्वीकृत हो जाता है, तो बिहार देश के उन गिने-चुने राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां वार्ड स्तर तक वित्तीय सशक्तिकरण की व्यवस्था होगी। इससे गांवों में विकास कार्यों की गति बढ़ने और स्थानीय समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।


